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Monday, 9 October 2017

                           १६०.प्रेम और दिल 


दिल के रिश्तों पर बात करना भी जहाँ पाप मालूम होता है ,
पूजती है दुनिया उसी को जहाँ पत्थरों का भी भय होता है !!

यूँ तो दीवानी है दुनिया राधा कृष्णा के अद्भुत् प्रेम की ,
लेकर राधा कृष्णा का नाम वहीँ पाप हर दिन होता है !!

दिल की आवाज दबा देते हैं हर दिन नर और नारी ,
वहीँ प्यार कि आढ़ में विश्वासघात हर दूसरे पल होता है !

अभागे हैं वो लोग दुनिया में जो तन्हाई में जीते हैं ,
पीते हैं आंसुओं को हर पल जहाँ प्यार बेशुमार होता है !!

अजूबा है ये दुनिया भी क्या कहें अभ्यस्त हो चुके हैं ,
जहाँ बंधन है क्या वहां सच में प्यार का भण्डार होता है !!

थक न जाए ये जिंदगी कभी तो समझा करो ए मेरे दिल ,
भरी दुनिया में भी सागर इंसान का तलबगार होता है !!

बरबादियों का जश्न मनाना भी एक शगल है जमाने में ,
मैकदा हाथों में ,होठों पर नगमा  आज भी पुराना होता है !!

डूब न जाए आंसुओं के बहती धारा में धारावाहिक की तरह ,
आजकल प्रेम भी TRP पाने का घटिया  नजारा होता है !!


न कर फ़रियाद न कर शिकवा जिंदगी से  रात दिन 
                     ///ए  मेरे दर्दे दिल ,/////
रोने से कब किसी को  प्यार "वर्षा "हासिल होता है !!

Saturday, 7 October 2017

                                       १५९,लेख 

मेरा लेख बदायूं एक्सप्रेस पर ।
http://www.badaunexpress.com/badaun-plus/a-5634/
पति पत्नी का रिश्ता एक समय के बाद ठंडा होकर अपने रिश्ते की गरिमा खोने लगता है ।शादी होने के बाद जहां दोनों ही इस रिश्ते के महत्व की अनदेखा करने लगते हैं ,वहीं से धीरे धीरे एक दूसरे के लिए अहसास खत्म होने लगते हैं । घर परिवार की जिम्मेदारियां ,बच्चों का पालन पोषण ,सामाजिक रस्म रिवाज जैसे दोनों को ही मात्र एक बंधन लगने लगते हैं ,और प्यार की भावना अपना दम तोड़ने लगती है ।जो प्यार और वायदे शादी से पहले होते हैं, क्यों वो शादी के बाद सिर्फ यादें बनकर रह जाती हैं ? महंगे कपड़े ,जेवर ही खुशियों का पर्याय नहीं होते ।यदि पति पत्नी दोनों ही एक दूसरे की छोटी छोटी बातों को महत्व दें तो प्यार की गरिमा को बनाये रखना कोई कठिन कार्य नहीं !
समय समय पर एक दूसरे की समस्याओं को सुनना ,एक दूसरे की पसंद का ध्यान रखना , दोनो को एक दूसरे के नजदीक लाता है । आज के समय मे सोशल मीडिया ने भी दूरियों को कम किया है ।एक छोटी सी कॉल भी आपकी जिंदगी को खुशियां दे सकती है ।
क्या कभी किसी ने सोचा है कि आजकल रिश्ते क्यों टूट रहे हैं ?क्यों मनभेद मतभेद का रूप धारण कर लेते हैं । क्यों एक पुरुष अपनी प्रेमिका की बातों को याद रखता है,लेकिन पत्नि की बातें जहर लगने लगती हैं । क्यों बच्चों के सामने पत्नी का कोई महत्व नहीं होता ? किसी दूसरे घर से आई पत्नी के लिए वो घर हमेशा पराया ही होता है । यदि पति पत्नी दोनों ही एक दूसरे की भावनाओं को दिल से समझें और सम्मान दें तो परिवार में प्यार को बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता ।
बच्चे अपनी जगह ,और आपसी प्यार अपनी जगह ।कोई किसी की जगह नहीं ले सकता । करवा चौथ का पवित्र व्रत पति-पत्नी को एक दूसरे के करीब लाने का अच्छा प्रयास है क्योंकि पति पत्नी का रिश्ता अटूट है । तो आइए आज से ही एक दूसरे को सम्मान देने का प्रण लें । महंगे गिफ्ट देने की बजाय एक दूसरे की जरूरतों का ध्यान रखें ।एक दूसरे के साथ वक़्त बिताएं । समय का क्या भरोसा ,क्यों न आज खुशियों को गले से लगाएं ।यदि खुशियां पैसों से खरीदी जाती तो शायद आज दुनिया का कोई भी रईस व्यक्ति दुखी नहीं होता ।
“तमन्ना है तेरे बाजूओं में मेरा दम निकले ,
मौत भी आये तो नाम सिर्फ तेरा निकले ।
गैरों से क्यों करते रहें गिला शिकवा ।
प्यार ही प्यार में जिंदगी ताउम्र निकले ।”
वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़

Friday, 6 October 2017

                         १५८,कविता 

जय श्री कृष्णा मित्रो ,मेरी रचना जयविजय पत्रिका मुम्बई के अगस्त अंक में ,आभार ।




                                     १५७,जयपुर  IndianTrailbraizer WomenAwards.

जय श्री कृष्णा मित्रो ,16 सितंबर की शाम और



,indian_trailblazer_women_awards at Totuka Bhavan ,jaipur जिसमें मुझे भी award मिला ।Me awarded by Dr. Chandra Kala Mathur, Sr. Professor SMS MEDICAL COLLEGE and attached Hospital and Suman sharma adyaksh, mahila aayog, Rajasthan .गुरुजी,मेरा परिवार और आप सभी मित्रों का बहुत बहुत आभार ।आयोजक टीम जिसके अध्यक्ष Dr-Niraj Mathur ji रहे ।आपका दिल से शुक्रिया ।

राजधानी जयपुर में नई राहें तलाशकर अपनी मंजिल पर पहुंची महिलाओं का हुआ सम्मान - MM NEWS TVhttp://www.mmnewstv.com/राजधानी-जयपुर-में-नई-राहे/ MM NEWS TV // हिमा अग्रवाल @ तोतूका भवन में सम्पन्न हुआ इण्डियन ट्रेलब्लेजर वीमन अवॉर्ड समारोह, 41 महिलाओं के सम्मान के साथ ही हुआ भव्य फैशन शो.. more @ mmnewstv.com

                                                     १५५,स्त्री 

जय श्री कृष्णा मित्रो ,शरद पूर्णिमा की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं ।मेरी रचना सौरभ दर्शन( राजस्थान) में ,

                                  १५४,विजयादशमी 

जब तक अपने कुत्सित विचारों पर अंकुश नहीं लगा पाएंगे विजयादशमी का अर्थ कैसे समझ पाएंगे ।


मोहहबत है खुदा मेरा ,भजन है इंसानियत ।
देखकर दूसरों का दुख आंसूं न आये आंखों में ,
कैसा है वो दीन धर्म ।
(शेरो शायरी जरिया है ग़मों को बांटने का , 
इबादत में खुदा की जन्नत की गुजारिश क्यों ?)