Followers

Tuesday, 15 August 2017

१३४,स्वतंत्रतता दिवस

15 अगस्त भारत के 71वे स्वतंत्रता दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं ।

जय भारत जय हिंद
हिंदी ,हिन्दू ,हिन्दुतान ,
भारत की सही पहचान ।
सर्वधर्म समानता ,
विश्व में इसकी शान ।

१३३.कृष्णा जन्माष्टमी

जय श्री कृष्णा ,आप सभी को मेरे कान्हा के जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई । दिल से लिखी एक कविता मेरे प्यार मेरे कृष्णा को समर्पित करती हूं  ।आभार सौरभ दर्शन साप्ताहिक पत्र भीलवाड़ा (राजस्थान) 12/8/17 .

प्यार हो तुम
दिल का अहसास हो तुम
संजोया था कभी ख्वाब में
उसी ख्वाब का राज हो तुम
भूल जाती हूँ जिंदगी को भी
उस जिंदगी का साज हो तुम
बाबरी हो गयी बनकर मीरा
ओ मेरे प्राण मेरे कृष्णा हो तुम।
बांसुरी की धुन पर दौड़ आयी थी कभी
वही राधा के कृष्णा हो तुम।
चाहती हूं बन जाऊं तेरे होठों की बंशी
ओ गोपाला मेरे कान्हा हो तुम।
लगन मेरी बुझा देना ओ सांवरे,
मेरे दिल के छैला हो तुम।
जला दी प्रेम की बाती
मेरे सूने से आंगन में ।
राधा के श्याम
रुक्मणी के भरतार हो तुम।
प्यार में तेरे बनकर बाबरी
सुध बुध अपनी भुला बैठी।
ओ कृष्णा मुझे कभी न भुला देना।
मेरी नैया मेरे जीवन की पतवार हो तुम।
सब कुछ कह दिया ओ गिरधारी ,
मेरी सूनी जिंदगी के रिश्तेदार हो तुम।
वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़

Sunday, 13 August 2017

                             १३२ शेर 

इश्क बदनाम है नाम से ,
काफ़िर जिंदगी क्यूँ बदनाम नहीं !
दस्तक दिल पर देकर इश्क को
बदनाम करने का हुनर कहाँ से सीखा इसने !



खुशबू प्यार की दिल को महका जाती है ,
क्यूँ दुनिया को नफ़रत है प्यार के नाम से !

                           १३१,हमारा भारत महान 

जय श्री कृष्णा मित्रो आपका दिन शुभ हो ।15 aug के उपलक्ष्य में मेरी रचना कल12/8/17 के दैनिक करंट क्राइम (नई दिल्ली ) में ! आभार 
जय हिंद जय भारत

                              १३० ,फेसबुक 

जय श्री कृष्णा मित्रो ,शुभ संध्या !!
फेसबुक एक ऐसा माध्यम है जहाँ हम अनगिनत अनजान लोगों के संपर्क में आते हैं ! जब कभी जिंदगी बोझ लगने लगती है ,यहाँ आकर लगता है जैसे दुनिया में बहुत कुछ है ! अपना सुख दुःख सभी एक दूसरे से शेयर करने लगते हैं ! ऐसा महसूस होता है ये एक बहुत बड़ा परिवार है ! जिन बातों को हम हमेशा गलत मानते हैं ,समझते हैं फिर भी जानकर उन्हीं रास्तों पर चलने लगते हैं ! किसी से भी अत्यधिक निकटता सिर्फ दुःख का ही कारण बनती है ! अपने लक्ष्य को भूलकर अनजाने रास्तों पर चलना जीवन को गतिहीनता ही देना है ! तो आइये कुछ ऐसा करें जिससे हम दूसरों के साथ खुद को भी सच्ची ख़ुशी दे सकें ! क्या औरों को दुःख देकर हम खुश रह सकते हैं ??/???

                                 १२९,बाल विवाह 

मेरी रचना सौरभ दर्शन साप्ताहिक पत्र राजस्थान (भीलवाड़ा )में प्रकाशित हुई ,आभार संपादक मंडल ।

                                       १२८,अल्पना 

जय श्री कृष्णा मित्रो ,शुभ संध्या ।
मेरी रचना दैनिक सांध्य ज्योति (भरतपुर )में आपकी समीक्षा के लिए ,