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Saturday, 30 July 2016

दर्द

                                            ६८ .दर्द 

उम्मीदों की शाख पर जब आ जाती है दरार ,
ढह जाती है मंजिलें बिन उठाये तलवार ।
दिल की गहराई में जाओगे तो कैसे भुला पाओगे ,वो हमारी यादों की सहमती सी तकरार ।
@@#####@@@@@####@##@@
शोख इरादे नापाक नहीं होते ,
साजिशें उन्हें मंजिल नहीं देती ।
झांकती दरारें दिखा जाती हैं
दिलों में छिपी सच्चाई .............
वरना हंसी कभी आइना नहीं होती ।

Video

Pls see it .

Friday, 29 July 2016

६७.रचना

                                       ६७ .नारी और समाज 

{आज की मेरी रचना वर्तमान परिप्रेक्ष्य में है !मैं न तो मायावती जी  के पक्ष में हूँ न ही स्वाति सिंह जी के !यहाँ बात सिर्फ नारी की अस्मत की है ! समाज में दयाशंकर और नसीमुद्दीन जैसे लोगों को एक बार जरूर सोचना चाहिए नारी के लिए कुछ बोलने से पहले !}
अजब चली बहार है ,सतयुग हो या कलयुग ,नारी होना हुआ गुनाहगार है :
हारे थे जब पांडव जुए में ,क्यूँ द्रौपदी पर बाजी लगाई थी ?
कर रहा था दुर्योधन चीरहरण ,क्यूँ मुंह पर पट्टी बाँधी थी !
वन वन भटकी राम संग सीता ,जो हर पल साथ निभाती थी :
कहने पर मात्र एक धोबी के ,अग्नि परीक्षा ली जाती थी !
लड़ते जब दो पुरुष आपस में ,बीच में माँ बहन को ले आते हैं ,
क्यूँ बनाकर मोहरा एक औरत को ,सरे आम रुस्बा करते हैं !
विज्ञापन हो पुरुष के कपड़ों का ,या फिर हो मोटर साइकिल का :
हर विज्ञापन में क्यूँ औरत को प्रचार की वस्तु बनाते हो !
दुनिया में गाड़ रही झंडे अपने अस्तित्व के ,वो नारी देवी कहलाती है ,
पूजते हो नव् दुर्गों में ,क्यूँ मंदिरों में भी सर झुकाते हो !
पढ़ते इतनी वेड ऋचाएं ,कृति हैं वो भी नारी की ,
क्यूँ गार्गी और अनुसुइया का योगदान भूल जाते हो !
फ़िल्में हो या फिर परिवार ,बिन उसके चल न पाते हैं !
नीरस लगता जीवन सारा ,क्यूँ उसका जीवन नरक बनाते हो !
मत घसीटो औरत को ,अपनी लोलुपता के अंगारों में ,
औरत है दुर्गा,वो है काली ,क्यूँ उसकी शक्ति को परवान चढ़ाते हो !
मिट गया जिस दिन अस्तित्व ,धरती से ममता की उस देवी का ,
कैसे बचा पाओगे खुद का जीवन ,...........................................
आज जिसे अपमानित कर नंगा नाच नचाते हो !
मत ललकारो औरत को ,फिर वो चाहे हो मायावती या फिर स्वाति सिंह :
बात नारी की अस्मत की है ,क्यूँ भेदभाव दिखलाते हो !
गलत हैं जो उन्हें शीशा दिखाओ तो ,क्यूँ बात को राजनीति की और ले जाते हो !!
                                  वर्षा वार्ष्णेय  अलीगढ
 सुरेंद्रनगर संगम बिहार कॉलोनी गली नंबर ३ नगला तिकोना रोड अलीगढ़ 

Thursday, 28 July 2016

                                          ६६.

मेरी  रचना आज के नॉएडा के "दैनिक चन्द्रहार "में ,

.कलम
मुद्दतों से तुझे लिखने को कलम मचल रही थी ,
साथ पाने को तेरा न जाने क्यूँ कुछ बुन रही थी !
अहसास था जैसे लम्हों को बस तेरा ,
तेरे साथ चलने को न जाने क्यूँ चहक रही थी !
कभी तन्हाई ,कभी महफ़िल की थी सदायें ,
ये कैसी आग थी जो खुद ही दहक रही थी !
कागज भी जार जार था जैसे तेरे न होने से ,
लगता था स्याही की तबियत भी सुलग रही थी !
फटे हुए कागज पर जब न लिखना कुछ गवारा हुआ ,
अचानक कलम का निब भी आवारा हुआ !!
कब तक लिखेगी कलम भी अपनी इबारत को ,
जब साथी ही उसका बेगाना हुआ !!
छोड़कर एक निश्छल सी सांस जब बुरे दौर से गुजर रही थी ,
कहाँ थी तेरी मशरूफियत जो धीरे धीरे तुझे ही निगल रही थी !!
एक ज़माना हुआ कलम को कागज से बिछुड़े हुए ,
आज वो नयी सदी की आग में झुलस रही थी !!

Wednesday, 27 July 2016

६५.कविता


मेरी रचना रायपुर के दैनिक पेपर जग प्रेरणा में ,

नफरतों से भरी इस दुनिया में एक चिराग प्यार का जलाकर तो देखो ,
छंट जायेगे कालिमा भरे बादल भी
एक मुस्कान प्यार भरी डालकर तो देखो।
बाअदब नही होती हर इंसान की फितरत ,
अदब से भरी है दिलों की फुलवारी ।
एक तीर प्यार भरा छोड़कर तो देखो।
मिट गए कितने ही सूरमा प्यार के अंदाज पर ,
प्यार पर खुद को कुर्बान करके तो देखो ।

Tuesday, 26 July 2016

६४.अफवाह

एक छोटी सी न्यूज़ को इतना बड़ा बनाकर आखिर सोशल मीडिया क्या दिखाना चाहता है ।एक चिंगारी कितने ही घरों को बेघर कर देती है ।किसी राजनीतिक पार्टी का कुछ नहीं बिगड़ता लेकिन कितने बच्चे अनाथ हो जाते हैं ।क्या सारे हिन्दू या सारे मुसलमान गलत हैं ?कभी देखा है आज भी कितने लोग एक साथ बैठकर खाते पीते है ,काम भी करते हैं ।ऐसी चिंगारी सिर्फ कुछ लोगो का भला कर जाती है ।अपनी प्रसिद्धि पाने के लिए क्या आपस में लड़ाई करवाना जरूरी है ?मुद्दे और भी है फेमस होने के लिए । pls अफवाह फैलाना बंद कीजिये ।

६३.दर्द

महसूस करना और समाहित करना एक  ही बात के दो पहलू है ,
गुजर जाना या गुजार देना ,जिंदगी के दो अंजान सवालात हैं ।

जीता तो है हर इंसान जिंदगी अपनी पर दूसरों के सुख के लिए ,
कब रख पाता है खुद का ख्याल अपनी छोटी सी ख़ुशी के लिए।

वो दूर शांत बहता हुआ समंदर  थक जाता है अपनी नीरवता से,
उठ जाता है भयंकर तूफ़ान उसके दिल में भी कुछ वक्त के लिए

सहती रहती है धरती भी बोझ हम सबका सिर्फ शांति के लिए ,
क्यों नहीं समझ पाते हम उसकी पीड़ा अपना अभिमान लिए ।

छोडो भी रहने दो बेकार की बातों को कौन समझ पायेगा ,
एक पत्थर दिल कब जी पाता है अपनी खुशियों के लिए ।।

६२.जय भारत जय जवान

वन्देमातरम

६१.कारगिल

लगा है हर तरफ मेला वीरों की शौहरत का ,
किसी को फ़िक्र कहाँ वीर जवानों की ।
खायीं थी जब सीने पर गोलियां वतन के लिए ,
जुबान पर शब्द थे उनके जय भारत माँ की।।
वंदेमातरम ,जय हो ।

बेटियां

बेटियां इज्जत की हक़दार या इजाजत की ,
पुरुष की पालनहार क्यों इज्जत को तरसी ?

Friday, 22 July 2016

                                        ५९ ज्योतिष 

हमारे देश की प्राचीन और सबसे सुंदर विद्या ज्योतिष को आज कुछ लोगों ने पैसों की खातिर बदनाम कर दिया है ।उसी पर मेरा व्यंग्य" होप्स मैगज़ीन में साभार


                                                                                                     

ज्योतिष पूजा पाठ आज बन गया अखाड़ा,
जिसकी लाठी उसकी भैंस जैसा हो गया नजारा ।
चार किताबें पढ़कर भविष्य आपका बताते हैं ,
अपने कल की खबर नहीं ,लोगों का भविष्य बताते हैं ।
कोई सुनाये लाल किताब ,तो कोई पीली बांचता है ,
लोगों से लेकर मोटी रकम अपनी तिजोरी भरता है ।
पढ़ लिखकर भी बने अन्धविश्वासी ,कोई इन्हें समझाए ।
जीवन है उस शक्ति के हाथों कोई तो राह दिखाये ।
टीवी में मिल जाते है कैसे सच्चे पंडित ,
हमें नहीं मिला आज तक जो सच्ची बात बताये ।
कोई टैरो कार्ड रीडर ,कोई अंक ज्योतिष बताता है ,
कोई हस्त रेखा ग्यानी कोई लाल किताब पढ़ाता है ।
कोई वैदिक ज्योतिष सुनाता ,तो कोई फेस रीडिंग कराता है ।
कोई हस्ताक्षर पढ़ने वाले तो कोई प्रश्न कुंडली सुनाता है 
किससे पूछें अपना हाल दिल बड़ा घबराता है ,
जब देनी पड़ती है नोटों की गड्डी ,इंसान हैरान रह जाता है ।
टीवी पर देखो कैसी बाढ़ आई है ,
भाग्य बताने वाले बन गए सेठ और पूछने वालों की लगी दुहाई है ।
जो खुद हैरान है अपने भाग्य पर ,वो कैसे औरों का भाग्य बतायेगा ,
वो बैठा है ऊपरवाला ,वही सिर्फ सच बतायेगा ।
अच्छा किया ईश्वर ने जो लेखा जोखा रखा अपने हाथों में ,
नहीं तो बेचारा इंसान आने वाले दुःख सुख को सोचकर ही मर जाएगा ।
www.hopesmagazine.in
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                               ५८.दिल की बात 


दिल की बात ,
मेरा मानना है यदि कोई व्यक्ति आपको दिल से कुछ भेंट करता है तो आपको उसे आभार जरूर प्रकट करना चाहिए , न कि सिर्फ भेंट की कीमत देखनी चाहिए ।जिसके पास जैसा है वो दिल से आपको उपहार देता है लेकिन जब उसको आप दो मीठे बोल भी वापस नहीं दे सकते तो उसका निराश होना स्वाभाविक है ।जब आपके साथ ऐसा होता है तो आपको क्या फील होता है ?

 
दुनिया में कौन क्या लाया है ,क्या लेकर जाएगा ।

दो मीठे बोल में सारा संसार मिल जाएगा ।

मिट्टी के शरीर का क्यों इतना गुरूर है ,

आएगा जब बुलावा सब ठाट पड़ा रह जाएगा ।।

                                   ५७.गुरु 

जिन मात पिता को पूछत नाही ,
उन के ज्ञान को क्या कहिये ।
गावत है गुरु को गुणगान ,
उनके अंदाज को क्या कहिये ।।
बिसरा कर स्वर्ग जमीन पर ,
इच्छा करत हैं परलोक की ,
उन बैरागी को सादर प्रणाम ,
उनकी अभिलाषा क्या कहिये।
करके कुर्बान सारी खुशियां ,
मिट जावत है देश के खातिर
जिन्हें तनिक लोभ नही प्राणन को 
उन वीर जवानों को क्या कहिये।।
(जय गुरुदेव ,जय हिंद )
                                                        

                          ५६.काबिलियत की क़द्र कहाँ 


मेरी रचना सौरभ दर्शन में 


                                         ५५.जज्बात 

मत खेलो किसी के जज्बातों से 

कहीं तुम्हे रोना न पड़े 

मत करो किसी से प्यार इतना 

कहीं तुम्हें खोना न पड़े 

मत खेलो किसी की जुल्फों से

कहीं उलझना न पड़े 

जिंदगी के रास्तों पर भीड़ है भारी
 
नहीं है पता जिंदगी में एक पल का 

कर लो तौबा बुरे कर्मों से

क्या पता कब जिंदगी को छोड़ना पड़े !!

Wednesday, 13 July 2016

                                     ५४. मिजाज 

मिजाज उनके देखकर गुरूर न आ जाए ,

तौबा खुद से करती हूँ कहीं जुल्म न हो जाए |




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ए यार इतनी बेरुखी न दिखा ,

कहीं मर ना जाऊं तेरे इश्क में |

Sunday, 10 July 2016

                                           ५३.फुर्सत 


फुर्सत मिले गर गैरों से, हमको भी याद कर लेना ,


गैर समझकर ही सही, कुछ ऐतबार कर लेना!


बहार नहीं आती बागबां में, सिर्फ फूलों के खिलने से 

,कभी रिश्तों की गहराइयों पर भी, दिल से यकीं कर लेना !!


                                                 

                                        ५२.जिंदगी 

जिंदगी से मिलकर ही जाना ,जिंदगी क्या होती है !
होती है वो खूबसूरत ,शायद तुम्हारे जैसी होती है !!


Jindagi se milkar hi jaana jindagi kya hoti h ,



Hoti h WO khubsurat shayad tumhre jaise hoti h .

Friday, 8 July 2016

                                        ५१.चाँद 

रात का सुरूर अपने शबाब पर था ,

इंतहा थी या प्यार की शरारत ,

नूर बरस रहा था क़यामत बनकर ,

क्योंकि चाँद भी आज इबादत पर था ।।

                                                                

Thursday, 7 July 2016

                                          ५०.यादें 


भूली हुई यादें ले जाती है मन को, जाने किस ओर,

सोच रहा मन आज भी उन्ही को, जिनसे हुआ बिछोह!!

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प्रीतकर कौन सुख पायो,जानत है सब लोग,

मानकर खुद को बिधाता क्यूँ बोराए हम लोग !!

                                                                     ४९.जिंदगी 

जिंदगी गर चलती दूसरों के इशारे से ,


तो न तुम रहते, तुम :


न ही मेरा वजूद होता !


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*

जिंदगी मगरूर नहीं होती 

,नकाब उसे मगरूर बना देता है !


*********************************************जीना ही सिर्फ जरूरी नहीं ,


जीने के लिए इंसानियत भी जरूरी है !

                                       ४८,यादें 

एक खुबसूरत सा अहसास

जब तुम्हारी आवाज सुनी 

सुनकर लगा आज भी किसी को

मेरी याद है , दूरसे आतीहुई

वो दिल को छू लेने वालीअदा ,

वो तुम्हें जाते हुए एक बार 

पलटकर देखने की हसीं याद

ताजा हो उठी ..

..............सच हीतो कहा है किसीने

यादें कभी मरती नहीं,

मर जाता है इंसान !

चाहे कोई कितना भी कहे

ये दिल बड़ा नादान !
                                                 

                                ४७.अभिभावक् और बच्चे  

कुछ दिनों पहले राजस्थान के कोटा शहर में एक लड़की नेआत्महत्या कर ली जबकि उसने अत्यंत कठिन मानी जाने वाली परीक्षा जेईई को क्लियर कर लिया था,मगर उसे आने वाले चार वर्ष तक जिन विषयों को पढ़ना पढता, उनमें उसकी कोई रूचि नहीं थी! वह मेडिकल की पढाई करना चाहती थी !यानी उसने जेईई का एग्जाम अपने पेरेंट्स के कहने परदिया ,लेकिन खुदको समाप्त कर लिया ! यहाँ एक ही प्रश्न उठता है कि क्या अपने बच्चों को उनकी इच्छा के विरुद्ध विषय दिलाना ठीक है? जिस विषय में बच्चे की रूचि ही नहीं क्या वोउसमें कुछअच्छा कर पायेगा? कई बार पेरेंट्स अपनी इच्छा बच्चों के ऊपर लाद देते है कि हम जो नहीं कर पाए तुम करो! क्याआज के समय में ये ठीक है?कृपया बच्चों का मनोविज्ञान समझें औरउनकी मदद करें! बच्चों परअत्यधिक दबाब न डालकर उनका उचित मार्गदर्शन करें न कि दूसरों की होड़ करें!हर बच्चाअलग होता है फिर आप किसी दूसरे बच्चे से उसकी बराबरी कैसे कर सकते हैं!कैरियर कोई भी बुरा नहीं! हाँ यदि आपका बच्चा होशियार है तो वो जरूर कुछ बनकर निकलेगा ! आपका सकारात्मक रवैया ही उसके भविष्य को सही राह दे सकता है!कृपया दूसरों से अपने बच्चे की तुलना न करें!!
                                                                                 

Wednesday, 6 July 2016

                                             ४६.सर्कस 

दुनिया एक सर्कस है ,जिसका मालिक अदृश्य  है !
 नचाता  है सबको उँगलियों पर ,चलता सब पर  उसी का हक  है !!
मिटटी से बनी काया ,क्यूँ इस पर इठलाता  है !
क्यूँ भुला दिया उस शक्ति  को ,जिसके हाथों में ये जीवन ,नश्वर  है !!

                                          ४५.पाती 


कैसे लिखूं...... प्रियवर को पाती, 

लेखनी भी आजकल बहुत शर्माती !

बीत गए महीने दिन सालों...

.......,
क्या तुमको भी बिरहा नहीं सताती ?

                             



                                         ४४.जीवन 

जीवन बीमा जैसी जिंदगी,बोनस जैसे "पल ",

तलाश खुशियों की हर महीने देकर ,किस्तों में क्षण !

क्लोज अप जैसी महक , हर व्यक्ति का "छल" ,

झूठी जिंदगी जी रहा , हर व्यक्ति हर "पल "!!


                                                          

                                          ४३.तुलसी 

जाते -जाते 


तुलसी का पौधा लगाकर घर को दे गयी वो हरियाली ;

खुश रहे मेरे बच्चे हर माँ की प्रार्थना अजब निराली !!




                                            ४२.वक्त 


वक्त किसी का नहीं होता,

आज तेरा है ,कल मेरा था !

सब गुलाम हैं किसी अदृश्य शक्ति के तो ,

कैसे मान लूँ इंसान किसी का गुलाम नहीं होता !!


(मेरी किताब "यही है जिंदगी" से)

Tuesday, 5 July 2016

                                           ४१.साँसें 

साँसों को मोहलत तो दो कुछ सोचने की ,
,
क्यों धड़कनों को उलझाते हो ।

बसे हुए हो कब से दिल में हमारे ,


क्यों अपनी याद दिलाते हो ।।







Monday, 4 July 2016

                                                   ४०. \\\मेरा काव्य संग्रह ",

मित्रो मेरी बुक" यही है जिंदगी "फ्लिपकार्ट पर भी उपलब्ध है ।उसकी लिंक है --
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Sunday, 3 July 2016

                                     ३९.लड़कियां 


लड़कियां क्यूँ होती हैं पराई
,
क्यूँ और किसने ये रीत बनायी !

मचलती है जब माँ बाप से मिलने के लिए
,
क्यूँ दुनिया ने संस्कारों की याद दिलाई !!

                                       ३८.नजाकत 


{ कुछ व्यंग्य आज के फैशन पर}


दुपट्टे को लेना नजाकत से ,पुरानी बात हो गयी !


फटी हुई जींस न जाने कब ,नजाकत बन गयी !!..

                                        ३७.कविता की चोरी 

गुजार दी एक कवि ने अपनी जिंदगी दूसरों की ख़ुशी के लिए ,
लोग लिख लेते हैं अपना नाम उसके आगे वाह वाही पाने के लिए !


जरा मेहनत तो करके देखो नाम कमाने के लिए,
संतोष मिलेगा खुद की कमाई हुई दो सूखी रोटी के लिए ।


अजीब चलन है जमाने में झूठी शान का ,
लोग भूल जाते हैं अपनी अहमियत फरेबी आन के लिए ।


क्यों हार गए हो खुद से ही तुम इतने ,
क्यों नहीं रहा यकीन खुद पर अपनी जीत के लिए ।


अभी भी वक़्त है संभल जाओ ,
पहचान लो खुद को तुम नहीं बने हो खुद के मजाक के लिए ।

Saturday, 2 July 2016

                                        36,दरिया 


दरिया की तरह बहती रहती

,शिकायत का कोई मोल नहीं !

गुजार दी तमाम उम्र दूसरों के लिए

खुद का कोई हिसाब नहीं !!
35.
34.मेरा काव्य संग्रह जो गत वर्ष प्रकाशित हो चुका है 
gd noon my all frnds jai shree krishna ,
मित्रो आज आपसे कुछ कहना है ,मेरा फ़ोन जो कार्बन कंपनी का है ,मैंने लास्ट इयर 12/6 /15 को लिया था ! खरीदने के 7 दिन के अंदर उस फोन में कमी आ गयी पर दूकानदार ने बदलने को मना कर दिया \| फ़ोन कंपनी में भेज दिया जो कि मुझे 1/5 महीने बाद वापस मिला | इतने दिन मैं बहुत परेशान रही | अब फिर से उस फ़ोन में कमी आनी शुरू हो गयी |मैंने फिर सेउसे कंपनी में भेजा |फ़ोन अभी भी गारंटी टाइम में था| मुझसे कहा गया कि आपको 1 महीने में फ़ोन मिल जायेगा | मेरा बेटा कई बार सर्विस सेंटर गया ,लेकिन वहां से कह दिया कि हमारे पास कोई इनफार्मेशन नहीं है |अब तक में कम से कम से 10 बार फ़ोन कर चुकी हूँ लेकिन हर बार बोलदेते हैंआपका फ़ोन अंडर रिपेयरिंग में है ,आपको वेट करना होगा | आप बताएं मैं क्या करूं ? मैं कार्बन के हेडऑफिस में भी मेलकर चुकी हूँ |वहां सेभीमेल आ गया आपको फ़ोन जल्दी मिल जाएगा ,लेकिन जब कॉल करो तो हर बार वही जवाब |मैंने फ़ोन 14 मई को दिया है | लगता है consumer court में जाना पडेगा |कार्बन का फ़ोन खरीदकर बहुत बड़ी गलती कर दी शायद ?

Friday, 1 July 2016

                                                                         ३३.हंसी
 सहज सुलभ सी इनकी हंसी ,
दिल को बरबस छू जाती ,
क्यूँ इनकी भूख और बेबसी ,
किसी को नजर नहीं आती !!










३२..जीवन की राह 
                                                            ३१.दुआएं


जमाने भर की दुआएं भी कम पड़ गयी एक तेरी 

बेबफाई के आगे ;



एक फीकी नज्म सी बन गयी है जिंदगी ,तेरी बेरुखी की


 अदाओं के आगे !!

                                                                   30. लेख

क्षमा चाहती हूँ आप सभी आदरणीय से लेकिन एक छोटा सा सवाल 

पूछना चाहती हूँ कि आप सभी देश की बातें करते हैं पर देश और समाज 

परिवार से बनता है ।जब एक परिवार का भाई दूसरे परिवार को तक़लीफ़

 देता है या एक परिवार के बड़े बुजुर्गों को बाहर निकाल कर बेटा ही 

उनको प्रताड़ित करता है तब वो समाज चुप क्यों रहता है ?


क्या वो परिवार समाज का अंग नहीं है ? "कोई व्यक्ति किसी के 

पारिवारिक मामलों में नहीं बोल सकता।"ब्लड इज थिकर दैन वाटर"।

आज लड़ने वाले भाई कल निश्चित रूप से एक होंगे। हर परिवार में झगड़े 

होते हैं।" ये कहना है हमारे समाज का । यही तो सोच है सबकी ।इसीलिए 

भाई भाई को और बेटा माँ बाप को परेशान करते हैं । जबकि ऐसा कुछ

 नहीं होता।जब समस्या बड़ी हो जाती है तो हर जगह समाज की जरूरत 

होती है ।जब ऐसे केस में समाज ही साथ नहीं देता ,तो समस्या गंभीर हो 

जाती हैं और अंत में लोग परिवार की बात कहकर अलग हो जाते हैं ।जब 

हमारे समाज में ही एकता नहीं तो देश में एकता कैसे हो सकती है । आप 

सबकी क्या राय है इस बारे में.