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Wednesday, 13 December 2017

                                             १८० , सम्मान 

हार्दिक धन्यवाद आदरणीय विजय सिंघल जी जयविजय पत्रिका मुंबई ।

                         १७९,जय श्री कृष्णा 

जीवन में कौन किसको याद रखता है ,
दुनिया सिर्फ मतलब का रिश्ता है ।
दम भरते हैं जो साथ देने का उम्र भर ,
हक़ीक़त में बदले का नाजुक नाता है ।
भूल जाएंगे एक दिन जब सारे रिश्ते ,
कोई भी साथ न निभाएगा ।
सारे रिश्तों से ऊपर एक ही नाता ,
सिर्फ कृष्णा ही साथ आएगा ।

                                 १७८ ,दांपत्य जीवन 

जिम्मेदारियां अपनी जगह हैं और दाम्पत्य जीवन अपनी जगह । सारी जिम्मेदारियों के बीच में आपसी प्यार को बनाये रखना ही जीवन का मूल उद्देश्य होना चाहिए । पैसे कमाने की धुन में इंसान उसी को क्यों भूल जाता है जिस परिवार के लिए वो दिन रात एक करता है । शादी से पहले और शादी के बाद में जीवन इतना क्यों और कैसे बदल जाता है । शायद किसी भी चीज या इंसान की वैल्यू उसके मिलने से पहले ही होती है । जीवन की विषम परिस्थितियों को भी सिर्फ प्यार और विश्वास के सहारे ही जीता जा सकता है ,यही प्रकृति का भी नियम है ।

                                 १७७,कविता 

जय श्री कृष्णा मित्रो ,मेरी एक और कविता मुंबई की मासिक पत्रिका जय विजय के नवम्बर अंक में ,

                                            १७६ शेर 

किसी का दिल दुखाना मेरी आदत नहीं ,
कोई मुझे रुलाये ये सहन होता नहीं ।
सच्चाई के रास्ते पर चलना कठिन है बहुत ,
नफरत समाज से करना मेरी फितरत नहीं ।.

छलक जाती हैं आंखें अक्सर महफ़िल में ,
तन्हाई में सुकून नजर आता है ।
कब तक संभाले कोई दिल को अपने ,
वजूद जब आईना नजर आता है ।


                              १७५ ,जय श्री राम 

जय श्री राम,
जन जन का सिर्फ एक ही नारा शुरू करो मंदिर निर्माण ,
देश मे अपने रहकर भी क्यों भूले अपनी पहचान
बीत गए कितने ही युग अब दिए हुए राम को बनवास 

कैसी निर्दयी न्याय प्रणाली भूल गए खुद की पहचान

राम के आदर्शों पर चलकर कैसे भूले अपनी सभ्यता ,
भारत के ओ वीर सपूतो लहरा दो अब देश की शान ।
मुद्दा राम मंदिर का कैसे बन गया जी का जंजाल ,
देश में अपने रहकर ही कबूल कर लिया गैरों का फरमान
एकता और अखंडता ही है भारत की पहचान ,
कूद पढ़ो अब तुम रण में यही है वक़्त की अजान ।

                            १७४ ,प्रकाशित कविता 

जय श्री कृष्णा मित्रो ,मेरी गजल मुंबई की मासिक पत्रिका जयविजय के दिसम्बर अंक में ,

          १७३ .नीरज जी से एक मुलाक़ात 10 dec 2017

जय श्री कृष्णा मित्रो ,आज मेरी वर्षों पुरानी तमन्ना पूरी हुई ।हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि और साहित्यकार ,पदम श्री ,पदम भूषण और फ़िल्मफ़ेयर पुरुस्कार से सम्मानित सर (श्री गोपालदास नीरज सक्सेना, जो धर्म समाज डिग्री कॉलेज अलीगढ़ में प्रोफेसर भी रह चुके हैं) ,से जब मैं मिली तो उनका सहज सरल व्यक्तित्व देखकर दंग रह गयी ।उनसे मिलने से पहले दिल में उनको लेकर काफी सवाल थे ,लेकिन उनको सामने देखकर मैं निरुत्तर रह गयी ।
जब मैंने उनको अपनी किताबें ,"यही है जिंदगी ,एकल काव्य संग्रह और संदल सुगंध ,साझा संकलन भेंट की ,तो उन्होंने मुझे आशीर्वाद भी दिया और कविता सुनाने को कहा ।आशीर्वाद स्वरूप जो उन्होंने मुझसे कहा उसे सुनकर मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा ।मेरे गुरु जी का आशीर्वाद मुझे याद आ गया ।सर ने मुझे जन्मजात कवियत्री और दिल की गहराइयों से लिखने वाली कवियत्री कहा ।ये शब्द जैसे मेरे दिल में उतर गए ।नीरज जी ,सर ने मुझे आगे होने वाले कवि सम्मेलन में बुलाने के लिए भी कहा ।मुझ जैसी कवियत्री के लिए ये बहुत ही सौभाग्य और खुशी की बात है कि मैं इतने महान व्यक्तित्व से रूबरू हो सकी ।नीरज जी के लिए मेरे लिए कुछ कहना आसान तो नहीं लेकिन दिल से उनका बहुत बहुत आभार प्रकट करती हूँ ।चंद पंक्तियाँ आदरणीय नीरज जी के सम्मान में ,,
"वो मिले हमसे कुछ इस अंदाज में ,
दिल भी खो गया उनके आगाज में !





अहंकार दूर दूर तक नजर नहीं आया ,
यूँ लगा दिल को........ मिल गया हो
जैसे सदियों का प्यार एक ही क्षण में!"

                                       १७२ ,शेर 

दर्द करता है रुसबा हमें ,
तो मुस्कराने में क्या हर्ज है ।
उम्मीदों की चादर जिंदा रखती है 
जिंदगी मुझ पर तेरा कर्ज है !

                                     १७१,शेर 


                       १७०,केशव सेवा धाम 

जय श्री कृष्णा ,केशव सेवा समिति ,सिंघारपुर मथुरा रोड अलीगढ़ के त्रिदिवसीय पूर्वोत्तर छात्र शिविर एवम 14 वां वार्षिक उत्सव में मुझे भी जाने का मौका मिला । कार्यक्रम देखकर मन प्रसन्न हो गया । समाज को इसी प्रकार के मार्गदर्शन की बहुत आवश्यकता है ।







                         


































                                 १६९ ,शेर 

यदि मुमकिन होता जीना यूँ सांस के बिना 
तो आज यूँ मुर्दा न होते 
ज़िंदा भी रहते और यूँ अकेले भी 
न होते शमशान में !!

राहों में हमसफ़र के कोई तनहा नहीं होता 
जुदाई हो जाए लाख पर प्यार कम नहीं होता 
जीने का बहाना जरूरी है सफ़र में 
बरना जिंदगी में जीने का मजा नहीं होता 

समंदर बसा है इन आँखों में 
कभी डूबकर तो देखा होता 
न होती जरूरत कश्ती की 
एक बार हाथ जो थामा होता 

ख्यालों में ही सही तेरे पास आकर मुस्करा लेते हैं,
दीवानगी है ये प्यार की या है दिल की अदाएं ।
मोह्हबत में खुद को यूं भी .........आजमा लेते हैं !

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हद में रहकर भी बहुत याद आते हैं ,
कुछ रिश्ते दर्द बनकर साथ रहते हैं

                               १६८, प्रेम या मोक्ष 

कभी कभी हम जिंदगी से वो मांग लेते हैं जो हमारे नसीब में होता ही नहीं ,और ताउम्र उसी के बारे में सोच सोचकर खुद को परेशान करते रहते हैं । हक़ीक़त जाने बिना बस अनजान रास्तों पर चलते रहते हैं,कभी कभी हम जिंदगी से वो मांग लेते हैं जो हमारे नसीब में होता ही नहीं ,और ताउम्र उसी के बारे में सोच सोचकर खुद को परेशान करते रहते हैं ।हक़ीक़त जाने बिना बस अनजान रास्तों पर चलते रहते हैं किसी मंजिल की तलाश में ।यही तो जिंदगी का कड़वा सच है ।

कभी कभी हम जिंदगी से वो मांग लेते हैं जो हमारे नसीब में होता ही नहीं ,और ताउम्र उसी के बारे में सोच सोचकर खुद को परेशान करते रहते हैं ।हक़ीक़त जाने बिना बस अनजान रास्तों पर चलते रहते हैं किसी मंजिल की तलाश में ।यही तो जिंदगी का कड़वा सच है ।



                                             १६७,शेर  

काश व्हाट्स एप और fb की तरह,
 जिंदगी भी इनस्टॉल हो जाती ।

न होती किसी से जुदाई ,

बिछुड़े हुओं से मुलाकात हो पाती ।    


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दीप से दीप कभी न जलाना ,
गर जीवन में खुश है रहना ।
प्यार की बाती बड़ी डालना ,
सहज होगा जीवन चलाना ।

                             १६६,जय हिन्द 

मित्रो मेरे घर के सामने एक फौजी रहते हैं ।जहां आज सभी परिवार के सदस्य एक साथ दीवाली मना रहे हैं,
वही वो अपने परिवार को आज ही छोड़कर देश की सेवा में चले गए ।देखकर दिल बहुत भावुक हो गया ।
देश के सभी सैनिक भाइयों को मेरा दिल से सलाम ,

भूलकर अपना परिवार जो लगे हैं दिन रात देश सेवा में 
हम मना रहे हैं आज त्यौहार वीर बंदों की बदौलत है ।

देखकर आंखें भर आती हैं उन माँ के सच्चे सपूतों को ,
सहज कर देती हैं विदा जो अपने जान के टुकड़ों को ।

हम लड़ रहे हैं सिर्फ पटाखे और जातिवाद के लिए ,
बहा देते हैं वो अपना खून भी देश की रक्षा के लिए ।

बेटी रोकती है बड़े प्यार से ,आज तो मत जाओ पापा ,
माँ समझा देती है देश बड़ा है मत रोको उनको जाने से

देखकर इतनी सहजता मस्तक झुक झुक जाता है ,
दिल करता है आज बोल दो एक जय कारा इन
सच्चे देश भक्तों के लिए ।

अपनों की जुदाई आसान नहीं एक पल के लिए ,
महान है वो माँ और पत्नी रोक लेती है जो आँसू
देश की सेवा के लिए ।

मना रहा है देश सारा आज दिवाली मस्ती में मगन होके
करते हैं हम शुक्रिया दिल से अपने वीर जवानों के लिए
जय हिंद जय जवान 

                                १६५ ,प्रकाशित कविता 

जय श्री कृष्णा मित्रो ,आप सभी की शाम सुहानी हो ।
सौरभ दर्शन साप्ताहिक (भीलवाड़ा )

मिट्टी के पुतलों जैसा जीवन ,
ठोकर लगी और टूट गए ।

कैसा गुरूर कैसी शान ,
मिट्टी में ही सिमट गए ।
सांझ हुई खुशियों की आस में ,
जरा सी बात पर पिघल गए ।
अधरों पर आ गयी मुस्कान ,
बच्चों जैसे बहक गए ।
कठपुतली ऊपर वाले की ,
कुछ भी अपने हाथ नहीं ।
जब भी खींची डोरी उसने ,
पल भर में ही सिमट गए।
देख तमाशा दुनिया का ,
ऐ दिल क्यों इतराता है ।
भेजा था ऊपरवाले ने
नेक किसी मकसद से ।
भूलकर अपनी मंजिल ,
झूठी दुनिया मे भटक गए

                                       १६४,उम्मीदें 

उम्मीदें मिटा देती हैं खुद के ही बजूद को ,
खिलाफत में जरा जमाने के तीर तो 
चला ।



                                         १६३,गजल 

जय श्री कृष्णा मित्रो ,जय विजय मासिक पत्रिका मुंबई के अक्टूबर अंक में एक
और गजल 

                                १६२,बेटी दिवस 

जय श्री कृष्णा ,अंतरराष्ट्रीय बेटी दिवस की आप सभी को बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं ।
(इसी संदर्भ में एक कहानी याद आती है ,जो मेरे दिल के बहुत करीब है )
कैसे लिखूं क्या लिखूं कुछ समझ नहीं आता कभी कभी ?शादी होने के बाद ससुराल में जाना और वहां सास ससुर का जल्दी से अम्मा बाबा बनने का सपना पूरा करने की इच्छा में शायद मुझे भी माँ बनने की खुशी होने लगी थी ,मेरे पति चार भाई हैं ।
उसके बाद भी सास ससुर की पहली इच्छा बेटा होने की ही थी ।रात दिन घर में पूजासब पाठ ,और बेटा होने के लिए मन्नतें मांगना दिल मे एक अजीब सा डर बैठने लगा था । कहीं बेटा नहीं हुआ तो बेटी हुई तो ? एक एक दिन बड़ी मुश्किल से गुजरता था ।माँ बनने की खुशियां जैसे कहीं खो गयी थी ।इसी कशमकश में दिन गुजरते गए । वो घड़ी भी आ ही गयी जिसका बेसब्री से इंतजार था । हमारे यहां पहले बच्चे को नए कपड़े नहीं पहनाते इसलिए मैं अपनी सहेली की बेटी के कुछ छोटे कपड़े ले आयी थी ।लेबर रूम में 3.30 घंटे दर्द सहने के बाद जब बच्चा हुआ तो मेरा पहला सवाल सिर्फ यही था कि क्या हुआ है बेटी या बेटा ।नर्स ने कोई जवाब नहीं दिया तो मैंने सारा दर्द भूलकर फिर से पूछा कि बताती क्यों नहीं क्या हुआ है ,तो नर्स बोली कि लक्ष्मी आयी है ।इतना सुनते ही जैसे मैं धरातल पर आ गयी ।आंखों से आंसूं बहने लगे कि अब क्या होगा । जिसका डर था वही हुआ ।बेटी होने की सुनकर किसी को कोई खुशी नहीं हुई और कह दिया कि बेटी के कपड़े लायी थी इसलिए बेटी हो गयी ।वाह रे हमारी पढ़ी लिखी सोच । मौसमी का रस पिया था इसलिए बेटी हो गयी ।मैं बुखार में पड़ी तप रही थी लेकिन बजाय हिम्मत के सिर्फ ताने ही मिले । पढ़ी लिखी फैमिली होने के बाद भी ,जिस घर मे एक भी बेटी नही थी ,उसको वो प्यार नहीं मिला ।शायद इसके लिए भी मैं ही कसूरवार थी ।बाद में उसी बेटी को सभी का बहुत प्यार मिला ,लेकिन कभी कभी वक़्त पर की गई कुछ बातें जीवन भर याद रह जाती हैं ।मेरी बेटी शुरू से ही पढ़ने लिखने में होशियार थी ।मैंने और उसके पिता ने उसकी पढ़ाई में कोई कमी नहीं छोड़ी ।उसका सपना एक अध्यापिका बनकर समाज की बेटियों को सही राह दिखाना था । आज मेरी बेटी इंग्लिश में पोस्ट ग्रेजुएट ,pgdca ,Ntt ,C,tet सभी क्लियर कर चुकी है और एक सफल अध्यापिका भी हैं । उसने मेरे सपने को साकार किया ।मुझे गर्व है अपनी बेटी पर ।आप सभी को भी अपनी बेटियों पर गर्व होना चाहिए । बेटी बचाओ ,बेटी पढ़ाओ का नारा तभी सार्थक हो सकता है ,जब हम सभी बेटियों के जीवन के प्रति एक अच्छी और सार्थक सोच रखें ।आज भी
लड़कों के मुकाबले लड़कियों का % कम है ,जो यही बताता है कि आज भी हमारी सोच पुराने दौर में ही अटकी हुई है ।

                                           १६१,बेटियां 

जय श्री कृष्णा मित्रो ,
(कभी मुद्दे की बात पर भी अपनी राय जरूर रखनी चाहिए ,शायद किसी की आंख खुल जाए ।)
कौन कहता है बेटियां बोझ नहीं होती ,आज के शिक्षित समाज में भी जब ऐसी बातें सुनने को मिलती हैं तब मन एक अनजानी सोच में डूब जाता है ।चंद दिनों पहले कन्या को देवी का रूप मानने वाले समाज में जब ऐसी वीभत्स घटनाएं सामने आती हैं तो समाज की सच्चाई सामने आ ही जाती है ।आज सुबह एक खबर ने फिर से दिल दहला दिया ।तीसरी नातिन होने पर दादी ने ही उसे मार दिया । कहाँ जा रहा है हमारा समाज ।हमारी संकीर्ण सोच हमें कहाँ ले जाएगी ।क्या बेटों से ही वंश चलता है ?क्या बेटियां यूँ ही मरती रहेंगी, कभी कोख में तो कभी जन्म के बाद ।मेरी नजर में तो ऐसे लोगों का समाज से ही निष्कासन कर देना चाहिए ।आपकी क्या राय है ?

Monday, 9 October 2017

                           १६०.प्रेम और दिल 


दिल के रिश्तों पर बात करना भी जहाँ पाप मालूम होता है ,
पूजती है दुनिया उसी को जहाँ पत्थरों का भी भय होता है !!

यूँ तो दीवानी है दुनिया राधा कृष्णा के अद्भुत् प्रेम की ,
लेकर राधा कृष्णा का नाम वहीँ पाप हर दिन होता है !!

दिल की आवाज दबा देते हैं हर दिन नर और नारी ,
वहीँ प्यार कि आढ़ में विश्वासघात हर दूसरे पल होता है !

अभागे हैं वो लोग दुनिया में जो तन्हाई में जीते हैं ,
पीते हैं आंसुओं को हर पल जहाँ प्यार बेशुमार होता है !!

अजूबा है ये दुनिया भी क्या कहें अभ्यस्त हो चुके हैं ,
जहाँ बंधन है क्या वहां सच में प्यार का भण्डार होता है !!

थक न जाए ये जिंदगी कभी तो समझा करो ए मेरे दिल ,
भरी दुनिया में भी सागर इंसान का तलबगार होता है !!

बरबादियों का जश्न मनाना भी एक शगल है जमाने में ,
मैकदा हाथों में ,होठों पर नगमा  आज भी पुराना होता है !!

डूब न जाए आंसुओं के बहती धारा में धारावाहिक की तरह ,
आजकल प्रेम भी TRP पाने का घटिया  नजारा होता है !!


न कर फ़रियाद न कर शिकवा जिंदगी से  रात दिन 
                     ///ए  मेरे दर्दे दिल ,/////
रोने से कब किसी को  प्यार "वर्षा "हासिल होता है !!

Saturday, 7 October 2017

                                       १५९,लेख 

मेरा लेख बदायूं एक्सप्रेस पर ।
http://www.badaunexpress.com/badaun-plus/a-5634/
पति पत्नी का रिश्ता एक समय के बाद ठंडा होकर अपने रिश्ते की गरिमा खोने लगता है ।शादी होने के बाद जहां दोनों ही इस रिश्ते के महत्व की अनदेखा करने लगते हैं ,वहीं से धीरे धीरे एक दूसरे के लिए अहसास खत्म होने लगते हैं । घर परिवार की जिम्मेदारियां ,बच्चों का पालन पोषण ,सामाजिक रस्म रिवाज जैसे दोनों को ही मात्र एक बंधन लगने लगते हैं ,और प्यार की भावना अपना दम तोड़ने लगती है ।जो प्यार और वायदे शादी से पहले होते हैं, क्यों वो शादी के बाद सिर्फ यादें बनकर रह जाती हैं ? महंगे कपड़े ,जेवर ही खुशियों का पर्याय नहीं होते ।यदि पति पत्नी दोनों ही एक दूसरे की छोटी छोटी बातों को महत्व दें तो प्यार की गरिमा को बनाये रखना कोई कठिन कार्य नहीं !
समय समय पर एक दूसरे की समस्याओं को सुनना ,एक दूसरे की पसंद का ध्यान रखना , दोनो को एक दूसरे के नजदीक लाता है । आज के समय मे सोशल मीडिया ने भी दूरियों को कम किया है ।एक छोटी सी कॉल भी आपकी जिंदगी को खुशियां दे सकती है ।
क्या कभी किसी ने सोचा है कि आजकल रिश्ते क्यों टूट रहे हैं ?क्यों मनभेद मतभेद का रूप धारण कर लेते हैं । क्यों एक पुरुष अपनी प्रेमिका की बातों को याद रखता है,लेकिन पत्नि की बातें जहर लगने लगती हैं । क्यों बच्चों के सामने पत्नी का कोई महत्व नहीं होता ? किसी दूसरे घर से आई पत्नी के लिए वो घर हमेशा पराया ही होता है । यदि पति पत्नी दोनों ही एक दूसरे की भावनाओं को दिल से समझें और सम्मान दें तो परिवार में प्यार को बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता ।
बच्चे अपनी जगह ,और आपसी प्यार अपनी जगह ।कोई किसी की जगह नहीं ले सकता । करवा चौथ का पवित्र व्रत पति-पत्नी को एक दूसरे के करीब लाने का अच्छा प्रयास है क्योंकि पति पत्नी का रिश्ता अटूट है । तो आइए आज से ही एक दूसरे को सम्मान देने का प्रण लें । महंगे गिफ्ट देने की बजाय एक दूसरे की जरूरतों का ध्यान रखें ।एक दूसरे के साथ वक़्त बिताएं । समय का क्या भरोसा ,क्यों न आज खुशियों को गले से लगाएं ।यदि खुशियां पैसों से खरीदी जाती तो शायद आज दुनिया का कोई भी रईस व्यक्ति दुखी नहीं होता ।
“तमन्ना है तेरे बाजूओं में मेरा दम निकले ,
मौत भी आये तो नाम सिर्फ तेरा निकले ।
गैरों से क्यों करते रहें गिला शिकवा ।
प्यार ही प्यार में जिंदगी ताउम्र निकले ।”
वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़

Friday, 6 October 2017

                         १५८,कविता 

जय श्री कृष्णा मित्रो ,मेरी रचना जयविजय पत्रिका मुम्बई के अगस्त अंक में ,आभार ।




                                     १५७,जयपुर  IndianTrailbraizer WomenAwards.

जय श्री कृष्णा मित्रो ,16 सितंबर की शाम और



,indian_trailblazer_women_awards at Totuka Bhavan ,jaipur जिसमें मुझे भी award मिला ।Me awarded by Dr. Chandra Kala Mathur, Sr. Professor SMS MEDICAL COLLEGE and attached Hospital and Suman sharma adyaksh, mahila aayog, Rajasthan .गुरुजी,मेरा परिवार और आप सभी मित्रों का बहुत बहुत आभार ।आयोजक टीम जिसके अध्यक्ष Dr-Niraj Mathur ji रहे ।आपका दिल से शुक्रिया ।

राजधानी जयपुर में नई राहें तलाशकर अपनी मंजिल पर पहुंची महिलाओं का हुआ सम्मान - MM NEWS TVhttp://www.mmnewstv.com/राजधानी-जयपुर-में-नई-राहे/ MM NEWS TV // हिमा अग्रवाल @ तोतूका भवन में सम्पन्न हुआ इण्डियन ट्रेलब्लेजर वीमन अवॉर्ड समारोह, 41 महिलाओं के सम्मान के साथ ही हुआ भव्य फैशन शो.. more @ mmnewstv.com

                                                     १५५,स्त्री 

जय श्री कृष्णा मित्रो ,शरद पूर्णिमा की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं ।मेरी रचना सौरभ दर्शन( राजस्थान) में ,

                                  १५४,विजयादशमी 

जब तक अपने कुत्सित विचारों पर अंकुश नहीं लगा पाएंगे विजयादशमी का अर्थ कैसे समझ पाएंगे ।


मोहहबत है खुदा मेरा ,भजन है इंसानियत ।
देखकर दूसरों का दुख आंसूं न आये आंखों में ,
कैसा है वो दीन धर्म ।
(शेरो शायरी जरिया है ग़मों को बांटने का , 
इबादत में खुदा की जन्नत की गुजारिश क्यों ?)

                                         १५३,रचना 

जय श्री कृष्णा मित्रो ,मेरी रचना जोधपुर के 28/9/17के सुप्रसिद्ध दैनिक नवज्योति में ,

                            १५२,भ्रूण हत्या 


नवदुर्गा में कन्याओं का पूजन करने वाले इस देश की एक सच्चाई ये भी है । जिस शक्ति ने राक्षसों का संहार किया ,आज उसी शक्ति को ये राक्षस अपने पैरों से कुचल रहा है ।किस युग मे जी रहे हैं हम आधुनिक या आदिम ।कुछ तो डरो भगवान से ,जिस दिन उसका रौद्र रूप सबके सामने आएगा कुछ भी नहीं बचेगा ।
आज कितनी कन्या भ्रूण हत्या हो रही हैं फिर देवी की पूजा क्यों ?????

                                १५१,प्रेम 

प्रेम सिर्फ एक समर्पण का भाव है ,फिर चाहे वो ईश्वर के प्रति हो या प्राणिमात्र के । 
प्रेम के बिना पूजा पाठ भी उसी तरह व्यर्थ है जैसे सांस के बिना शरीर ।


हमारे विचार ही हमें कमजोर बनाते हैं वरना दुनिया की कोई ताकत हमें हरा नही सकती ।

                                     १५०,गजल 

नीर भरी इन आँखों मे कैसे कोई समायेगा ,
टूट गया जब सपना कोई कैसे सच हो पायेगा ।

यादों के गहरे समंदर में अक्सर गोते खाते हैं ,
मुक्त हुई धारा के लिए कौन बांध बनाएगा ।

प्यार की बहती अविरल धारा को कौन रोक पाया है ,
न ही कश्ती न ही खिवैया कौन पार ले जाएगा ।

जीवन है एक सागर जैसा किनारा नजर नहीं आता है ,
ढूंढ रही हैं आंखें उसको जो पार ले जाएगा ।

                          १४९,हिंदी दिवस 


                              १४८,आगमन समारोह 


यादगार पल धन्यवाद आगमन 💐💐💐💐💐
संदल सुगंध
रविवार 10 सितम्बर को दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी , चांदनी चौक दिल्ली के अमीर खुसरो सभागार में आगमन का पंचम स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया गया . इस अवसर पर ‘संदल सुगंध’ संकलित काव्य संग्रह के 5 भागो के लोकार्पण सहित श्री कपिल कुमार (बेल्जियम ) के मुक्तक संग्रह ‘सुनहरे अश्क ‘ एवं श्री दीपचंद महावर ‘शादाब ‘ के काव्य संग्रह ‘बिन पिरोये पर्ल्स “ का लोकार्पण सपन्न हुआ.
देश विदेश से संदल सुगंध के जिन रचनाकारों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया ,उनके नाम हैं : श्री अभिषेक कुमार शुक्ल ‘शुभम ‘ (सुलतानपुर ) , श्री अजय प्रताप सिंह चौहान (कानपुर ) , श्री अमृत राज (पुणे ) , श्री आनंद वर्धन शर्मा ( अल्मोड़ा ) , श्री अनिल कुमार सिंह (फैजाबाद ) , डॉ अंजू ठकराल (बीकानेर ) , डॉ अपर्णा शिव शर्मा (अंकलेश्वर ) , श्री अरुण धर्मावत (जयपुर ) , श्रीमती अनुपमा झा (नयी दिल्ली ) , श्रीमती अलका गुप्ता (मेरठ ) , श्री अश्विनी जोशी ( धारूहेड़ा ) , श्री ओमप्रकश कल्याणे ( नयी दिल्ली ) , कर्नल केशव सिंह ( ग्रेटर नॉएडा ) , श्रीमती किरण मिश्रा ( नॉएडा ) , श्रीमती कुसुम सिंह ( कानपुर ) , श्री कपिल कुमार (बेल्जियम ) , श्रीमती गुंजन श्रीवास्तव (कटनी , म प्र ) , श्रीमती डॉली अग्रवाल ( तावडू , गुरुग्राम ) ,श्रीमती चांदनी वर्मा ( बागपत ) , डॉ ज्योत्स्ना जैन ( नयी दिल्ली ) , सुश्री तन्वी सिंह ( आरा , बिहार ) , डॉ दुर्गा सिन्हा ‘उदार ‘ ( फरीदाबाद ) , श्री दीपचंद महावर ‘शादाब “ (दहोद , गुजरात ) ,श्री देवेश पाण्डेय (बिहार ) ,श्रीमती निवेदिता मिश्रा झा (दिल्ली ), श्रीमती नीतू गोयल (मोहाली ) ,श्रीमती नीरजा मेहता ( गाजियाबाद ) , श्री नसीर खान ( नयी दिल्ली ) , श्री नरेन्द्र श्रीवास्तव ‘अटल ‘ ( खारगोन, म प्र ) ,डॉ नरेश सागर (हापुड़ ) , श्री नवेंदु चाँद ( दिल्ली ) , श्री निहाल मोदी (बिहार ) , श्रीमती नीरू मोहन ( दिल्ली ) , श्रीमती नीरा अरीन जैन ( जयपुर ) , श्रीमती निधि मुकेश भार्गव (दिल्ली ), श्रीमती प्रिया सिन्हा ‘संदल’ (नॉएडा ) ,श्रीमती पारुल भार्गव (ग्वालियर ) , श्रीमती पूनम चन्द्रवंशी ( नॉएडा ) , श्रीमती प्रज्ञा जैमिनी ( दिल्ली ) , सुश्री प्रीति दक्ष ( दिल्ली ) , डॉ प्रशांत देव मिश्रा (एटा ) , श्री फरहत जामा खान सागर (नजीबाबाद ), डॉ बेगराज सिंह यादव (नजीबाबाद ) , श्रीमती भूपिन्दर कौर ( दिल्ली ) , सुश्री भारती सिंह रघुवंशी (दुबई ) , श्री मनोज कुमार यादव (कानपुर ) , डॉ मीना नकवी (मुरादाबाद ) , श्रीमती मनु श्वेता (खतौली , मुज़फ्फरनगर ) , श्री मनोज उपाध्याय ‘मतिहीन’ (रायपुर , छत्तीसगढ़ ) , श्रीमती मीनाक्षी माथुर (जयपुर ) , श्रीमती मीनाक्षी सुकुमारन ( नॉएडा ) , डॉ मीनू पाण्डेय ( भोपाल ) , श्री महेंद्र शर्मा ‘मधुकर ‘ (फरीदाबाद ) , श्रीमती मनीषा जोशी ( ग्रेटर नॉएडा ) , श्री मोहन लाल तेजियान ( हापुड़ ) , श्रीमती माधुरी स्वर्णकार ( दिल्ली ) , श्रीमती यश किरण ( लखनऊ ) , श्री राहुल कुमार ( बिहार ) , श्री रजनीश भारद्वाज ( इंदौर ) , डॉ रविश रंजन ( बिहार ) ,श्रीमती रोहिणी धमीजा ( मुरादाबाद ) , श्रीमती रुपिंदर बरार ( मोहाली ) , श्रीमती रंजीता नाथ घई ( अलवर ) , श्रीमती रंजीता अशेष ( नयी दिल्ली ) , श्रीमती वर्षा वार्ष्णेय ( अलीगढ ) , डॉ विमला व्यास ( इलाहबाद ) , श्री विजय स्वर्णकार ( दिल्ली ) , डॉ विश्व दीपक बमोला ( नयी दिल्ली ) , श्री विनोद कुमार वर्मा ( गाजियाबाद ) , श्री विष्णु शर्मा ( भिलाई ) , श्री विवेक शर्मा ( आगरा ) , डॉ वीणा मित्तल ( गाजियाबाद ) , श्री विकास जैन ( दिल्ली ) , डॉ वीर पटेल ( बंगार्मौ , उन्नाव ) , श्रीमती शीतल गोयल ( ग्रेटर नॉएडा ) , सुश्री शिप्रा खरे (गोला , खीरी ) , डॉ शुभंकर मुख़र्जी ( कुरुक्षेत्र ) , श्री सचिन मेहरोत्रा ( लखनऊ ) , श्रीमती संगीता शर्मा ( अलवर ) , श्रीमती सरोज तिवारी ( पटना ) , श्री संजीव बेदी ( आगरा ) , श्रीमती सविता वर्मा ‘गजल’ ( मुज़फ्फरनगर ) , डॉ सीमा अग्रवाल ( मुरादाबाद ) , श्रीमती सीमा अग्रवाल ( नयी दिल्ली ) , श्रीमती सीमा भाटिया ( लुधियाना ) , श्रीमती सूक्ष्म लता महाजन ( नॉएडा ) , श्री सुंदर सिंह ( दिल्ली ) , श्री सुनील आशियाँ (जयपुर ) , डॉ सुषमा शर्मा (मेरठ ) , श्रीमती सरिता ‘रीत’ ( नामरूप , आसाम ) , श्री सौरभ अवस्थी ( लखनऊ ) , श्रीमती स्वदेश सिंह चरौरा ( फरीदाबाद ) , श्री हरी प्रकाश गुप्ता ( भिलाई ) ..आगमन परिवार की ओर से संदल सुगंध के रचनाकारों का दूर दूर से आ कर इस कार्यक्रम को भव्यता प्रदान करने के लिए तहे दिल से शुक्रिया ...उम्मीद है कि भविष्य में भी उनका ऐसा ही स्नेह और सहियोग आगमन परिवार को मिलता रहेगा .
आगमन समूह की सह –संस्थापक डॉ स्वीट एंजेल के सुमधुर स्वागत भाषण और उन्ही के सञ्चालन में श्रीमती मंजू जोहरी ‘मधुर’ द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वन्दना से शुरू डॉ अशोक मधुप की अध्यक्षता में सम्पन्न इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री लक्ष्मी शंकर बाजपेयी , एवं विशिष्ट अतिथि श्री मंगल नसीम , डॉ हरीश नवल , श्री सुभाष चंदर , श्री दिनेश रघुवंशी , श्रीमती ममता किरण की गौरवमयी उपस्थिति को सादर नमन
कार्यक्रम की अगली श्रंखला में आगमन सम्मान समारोह आयोजित किया गया ...श्री दिनेश रघुवंशी एवं श्रीमती ममता किरण को ‘आगमन भूषण सम्मान -2017” से अलंकृत करना आगमन परिवार के लिए अविस्मर्णीय पल थे ....श्रीमती इंदिरा पूनावाला को अमृता प्रीतम सम्मान -2016 से अलंकृत किया गया .राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त गज़लकार श्रीमती तूलिका सेठ को “पंडित ओमप्रकाश चतुर्वेदी ‘पराग’ आगमन शिखर सम्मान -2017”प्रदान किया गया ..आगमन समूह के सदस्यों को आगमन समूह के कार्यक्रमों एवं गतिविधियों में सराहनीय योगदान हेतु हर वर्ष प्रदान किया जाने वाला ‘आगमन गौरव सम्मान -2017” आगमन समूह के निम्न सक्रिय सदस्यों को प्रदान किया गया
श्रीमती भूपिन्दर कौर ( दिल्ली ), श्री दीपचंद महावर ‘शादाब ( दहोद, गुजरात ) “, श्री फरहत जमा खान ‘सागर’ ( नजीबाबाद ), डॉ वीर पटेल ( उन्नाव ) , श्रीमती पारुल भार्गव ( ग्वालियर ) , श्रीमती निधि मुकेश भार्गव ( दिल्ली ) , श्रीमती रंजीता अशेष ( नयी दिल्ली ) , श्री महेंद्र शर्मा ‘मधुकर’ (फरीदाबाद ) , श्रीमती कुसुम सिंह ( कानपुर ) , डॉ वीणा मित्तल ( गाजियाबाद ) , श्रीमती डॉली अग्रवाल ( तावडू , गुरुग्राम ) , श्री संजीव बेदी ( आगरा ) , सुश्री शिप्रा खरे ( गोला , खीरी ) , श्री विष्णु शर्मा ( भिलाई )
युवा शायर श्री सचिन मेहरोत्रा (लखनऊ ) , युवा कवि श्री विकास जैन (दिल्ली ) , युवा कवयित्री सुश्री तन्वी सिंह ( आरा , बिहार ) , युवा कवयित्री श्रीमती चांदनी वर्मा ( बागपत ) को आगमन युवा प्रतिभा सम्मान -2017 से अलंकृत किया गया .
श्री कपिल कुमार ( बेल्जियम ) के मुक्तक संग्रह “सुनहरे अश्क “ का लोकार्पण आगमन के इस कार्यक्रम की उपलब्धि रहा ..बेल्जियम में रह रहे और वहां हिंदी के प्रचार एवं प्रसार के सराहनीय कार्य कर रहे कपिल जी का अपनी पुस्तक का लोकार्पण आगमन के मंच से सम्पन्न कराने की सहमती देना आगमन समूह के लिए गौरव के पल के रूप में अविस्मर्णीय बन गए ...अपने संबोधन में कपिल जी ने अपने संग्रह से कुछ मुक्तक पड़े और अपने कुछ दिली जज्बात प्रस्तुत किये ..श्री दिनेश रघुवंशी , श्री विनोद पाण्डेय आदि ने विशेष रूप से कपिल जी के व्यक्तिव एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला एवं आगमन समूह को सुन्दर आयोजन के लिए बधाई दी
अपने अपने वक्तव्यों में श्री लक्ष्मी शंकर बाजपेयी , श्री मंगल नसीम , डॉ हरीश नवल , श्री सुभाष चंदर ने कविता , साहित्य के मर्म , धर्म पर अपने अनुभवों से युवा रचनाकारों के प्रेरणाश्रोत की अपनी भूमिका एवं दायित्व का बखूबी निर्वहन किया और इन सभी साहित्य के पुरुधाओं को आगमन परिवार का दिल से नमन
श्रीमती ममता किरण ने अपने सुमधुर कंठ से अपने काव्य पाठ से पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध किया ..डॉ सविता उपाध्याय (गुरुग्राम ) ने भी इस अवसर पर आगमन पत्रिका के “मृदुला सिन्हा केन्द्रित अंक “ के विषय में बताया
समारोह के दूसरें सत्र में संदल सुगंध के रचनाकारों एवं आगमन समूह के आजीवन सदस्यों ने अपने काव्य पाठ से मन मोह लिया ..एक से बढ़ कर एक सारगर्भित रचनाये प्रस्तुत कर उन्होंने ये साबित कर दिया कि नवोदित कवि /शायर जिसजिस तरीके से अपनी रचनाधर्मिता का निर्वहन कर रहे हैं उससे कविता /ग़ज़ल का भविष्य उनके हाथो में सुरक्षित है ..कार्यक्रम के दूसरें सत्र का सञ्चालन आगमन समूह की संयुक्त महासचिव एवं लोकप्रिय कवयित्री /लेखिका श्रीमती मनीषा जोशी ने किया
अंत में डॉ अशोक मधुप के अध्यक्षीय संबोधन के पश्चात आगमन की उपलब्धियों में एक और यादगार कार्यक्रम जुड़ गया ..पूरी आगमन टीम को दिल से बधाई
आगमन पंचम स्थापना दिवस समारोह की लाइव रिकॉर्डिंग Live50 चैनल द्वारा की गयी ..आगमन की तरफ से Live50 की पूरी टीम का तहे दिल से आभार