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Monday, 9 October 2017

                           १६०.प्रेम और दिल 


दिल के रिश्तों पर बात करना भी जहाँ पाप मालूम होता है ,
पूजती है दुनिया उसी को जहाँ पत्थरों का भी भय होता है !!

यूँ तो दीवानी है दुनिया राधा कृष्णा के अद्भुत् प्रेम की ,
लेकर राधा कृष्णा का नाम वहीँ पाप हर दिन होता है !!

दिल की आवाज दबा देते हैं हर दिन नर और नारी ,
वहीँ प्यार कि आढ़ में विश्वासघात हर दूसरे पल होता है !

अभागे हैं वो लोग दुनिया में जो तन्हाई में जीते हैं ,
पीते हैं आंसुओं को हर पल जहाँ प्यार बेशुमार होता है !!

अजूबा है ये दुनिया भी क्या कहें अभ्यस्त हो चुके हैं ,
जहाँ बंधन है क्या वहां सच में प्यार का भण्डार होता है !!

थक न जाए ये जिंदगी कभी तो समझा करो ए मेरे दिल ,
भरी दुनिया में भी सागर इंसान का तलबगार होता है !!

बरबादियों का जश्न मनाना भी एक शगल है जमाने में ,
मैकदा हाथों में ,होठों पर नगमा  आज भी पुराना होता है !!

डूब न जाए आंसुओं के बहती धारा में धारावाहिक की तरह ,
आजकल प्रेम भी TRP पाने का घटिया  नजारा होता है !!


न कर फ़रियाद न कर शिकवा जिंदगी से  रात दिन 
                     ///ए  मेरे दर्दे दिल ,/////
रोने से कब किसी को  प्यार "वर्षा "हासिल होता है !!

Saturday, 7 October 2017

                                       १५९,लेख 

मेरा लेख बदायूं एक्सप्रेस पर ।
http://www.badaunexpress.com/badaun-plus/a-5634/
पति पत्नी का रिश्ता एक समय के बाद ठंडा होकर अपने रिश्ते की गरिमा खोने लगता है ।शादी होने के बाद जहां दोनों ही इस रिश्ते के महत्व की अनदेखा करने लगते हैं ,वहीं से धीरे धीरे एक दूसरे के लिए अहसास खत्म होने लगते हैं । घर परिवार की जिम्मेदारियां ,बच्चों का पालन पोषण ,सामाजिक रस्म रिवाज जैसे दोनों को ही मात्र एक बंधन लगने लगते हैं ,और प्यार की भावना अपना दम तोड़ने लगती है ।जो प्यार और वायदे शादी से पहले होते हैं, क्यों वो शादी के बाद सिर्फ यादें बनकर रह जाती हैं ? महंगे कपड़े ,जेवर ही खुशियों का पर्याय नहीं होते ।यदि पति पत्नी दोनों ही एक दूसरे की छोटी छोटी बातों को महत्व दें तो प्यार की गरिमा को बनाये रखना कोई कठिन कार्य नहीं !
समय समय पर एक दूसरे की समस्याओं को सुनना ,एक दूसरे की पसंद का ध्यान रखना , दोनो को एक दूसरे के नजदीक लाता है । आज के समय मे सोशल मीडिया ने भी दूरियों को कम किया है ।एक छोटी सी कॉल भी आपकी जिंदगी को खुशियां दे सकती है ।
क्या कभी किसी ने सोचा है कि आजकल रिश्ते क्यों टूट रहे हैं ?क्यों मनभेद मतभेद का रूप धारण कर लेते हैं । क्यों एक पुरुष अपनी प्रेमिका की बातों को याद रखता है,लेकिन पत्नि की बातें जहर लगने लगती हैं । क्यों बच्चों के सामने पत्नी का कोई महत्व नहीं होता ? किसी दूसरे घर से आई पत्नी के लिए वो घर हमेशा पराया ही होता है । यदि पति पत्नी दोनों ही एक दूसरे की भावनाओं को दिल से समझें और सम्मान दें तो परिवार में प्यार को बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता ।
बच्चे अपनी जगह ,और आपसी प्यार अपनी जगह ।कोई किसी की जगह नहीं ले सकता । करवा चौथ का पवित्र व्रत पति-पत्नी को एक दूसरे के करीब लाने का अच्छा प्रयास है क्योंकि पति पत्नी का रिश्ता अटूट है । तो आइए आज से ही एक दूसरे को सम्मान देने का प्रण लें । महंगे गिफ्ट देने की बजाय एक दूसरे की जरूरतों का ध्यान रखें ।एक दूसरे के साथ वक़्त बिताएं । समय का क्या भरोसा ,क्यों न आज खुशियों को गले से लगाएं ।यदि खुशियां पैसों से खरीदी जाती तो शायद आज दुनिया का कोई भी रईस व्यक्ति दुखी नहीं होता ।
“तमन्ना है तेरे बाजूओं में मेरा दम निकले ,
मौत भी आये तो नाम सिर्फ तेरा निकले ।
गैरों से क्यों करते रहें गिला शिकवा ।
प्यार ही प्यार में जिंदगी ताउम्र निकले ।”
वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़

Friday, 6 October 2017

                         १५८,कविता 

जय श्री कृष्णा मित्रो ,मेरी रचना जयविजय पत्रिका मुम्बई के अगस्त अंक में ,आभार ।




                                     १५७,जयपुर  IndianTrailbraizer WomenAwards.

जय श्री कृष्णा मित्रो ,16 सितंबर की शाम और



,indian_trailblazer_women_awards at Totuka Bhavan ,jaipur जिसमें मुझे भी award मिला ।Me awarded by Dr. Chandra Kala Mathur, Sr. Professor SMS MEDICAL COLLEGE and attached Hospital and Suman sharma adyaksh, mahila aayog, Rajasthan .गुरुजी,मेरा परिवार और आप सभी मित्रों का बहुत बहुत आभार ।आयोजक टीम जिसके अध्यक्ष Dr-Niraj Mathur ji रहे ।आपका दिल से शुक्रिया ।

राजधानी जयपुर में नई राहें तलाशकर अपनी मंजिल पर पहुंची महिलाओं का हुआ सम्मान - MM NEWS TVhttp://www.mmnewstv.com/राजधानी-जयपुर-में-नई-राहे/ MM NEWS TV // हिमा अग्रवाल @ तोतूका भवन में सम्पन्न हुआ इण्डियन ट्रेलब्लेजर वीमन अवॉर्ड समारोह, 41 महिलाओं के सम्मान के साथ ही हुआ भव्य फैशन शो.. more @ mmnewstv.com

                                                     १५५,स्त्री 

जय श्री कृष्णा मित्रो ,शरद पूर्णिमा की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं ।मेरी रचना सौरभ दर्शन( राजस्थान) में ,

                                  १५४,विजयादशमी 

जब तक अपने कुत्सित विचारों पर अंकुश नहीं लगा पाएंगे विजयादशमी का अर्थ कैसे समझ पाएंगे ।


मोहहबत है खुदा मेरा ,भजन है इंसानियत ।
देखकर दूसरों का दुख आंसूं न आये आंखों में ,
कैसा है वो दीन धर्म ।
(शेरो शायरी जरिया है ग़मों को बांटने का , 
इबादत में खुदा की जन्नत की गुजारिश क्यों ?)

                                         १५३,रचना 

जय श्री कृष्णा मित्रो ,मेरी रचना जोधपुर के 28/9/17के सुप्रसिद्ध दैनिक नवज्योति में ,

                            १५२,भ्रूण हत्या 


नवदुर्गा में कन्याओं का पूजन करने वाले इस देश की एक सच्चाई ये भी है । जिस शक्ति ने राक्षसों का संहार किया ,आज उसी शक्ति को ये राक्षस अपने पैरों से कुचल रहा है ।किस युग मे जी रहे हैं हम आधुनिक या आदिम ।कुछ तो डरो भगवान से ,जिस दिन उसका रौद्र रूप सबके सामने आएगा कुछ भी नहीं बचेगा ।
आज कितनी कन्या भ्रूण हत्या हो रही हैं फिर देवी की पूजा क्यों ?????

                                १५१,प्रेम 

प्रेम सिर्फ एक समर्पण का भाव है ,फिर चाहे वो ईश्वर के प्रति हो या प्राणिमात्र के । 
प्रेम के बिना पूजा पाठ भी उसी तरह व्यर्थ है जैसे सांस के बिना शरीर ।


हमारे विचार ही हमें कमजोर बनाते हैं वरना दुनिया की कोई ताकत हमें हरा नही सकती ।

                                     १५०,गजल 

नीर भरी इन आँखों मे कैसे कोई समायेगा ,
टूट गया जब सपना कोई कैसे सच हो पायेगा ।

यादों के गहरे समंदर में अक्सर गोते खाते हैं ,
मुक्त हुई धारा के लिए कौन बांध बनाएगा ।

प्यार की बहती अविरल धारा को कौन रोक पाया है ,
न ही कश्ती न ही खिवैया कौन पार ले जाएगा ।

जीवन है एक सागर जैसा किनारा नजर नहीं आता है ,
ढूंढ रही हैं आंखें उसको जो पार ले जाएगा ।

                          १४९,हिंदी दिवस 


                              १४८,आगमन समारोह 


यादगार पल धन्यवाद आगमन 💐💐💐💐💐
संदल सुगंध
रविवार 10 सितम्बर को दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी , चांदनी चौक दिल्ली के अमीर खुसरो सभागार में आगमन का पंचम स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया गया . इस अवसर पर ‘संदल सुगंध’ संकलित काव्य संग्रह के 5 भागो के लोकार्पण सहित श्री कपिल कुमार (बेल्जियम ) के मुक्तक संग्रह ‘सुनहरे अश्क ‘ एवं श्री दीपचंद महावर ‘शादाब ‘ के काव्य संग्रह ‘बिन पिरोये पर्ल्स “ का लोकार्पण सपन्न हुआ.
देश विदेश से संदल सुगंध के जिन रचनाकारों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया ,उनके नाम हैं : श्री अभिषेक कुमार शुक्ल ‘शुभम ‘ (सुलतानपुर ) , श्री अजय प्रताप सिंह चौहान (कानपुर ) , श्री अमृत राज (पुणे ) , श्री आनंद वर्धन शर्मा ( अल्मोड़ा ) , श्री अनिल कुमार सिंह (फैजाबाद ) , डॉ अंजू ठकराल (बीकानेर ) , डॉ अपर्णा शिव शर्मा (अंकलेश्वर ) , श्री अरुण धर्मावत (जयपुर ) , श्रीमती अनुपमा झा (नयी दिल्ली ) , श्रीमती अलका गुप्ता (मेरठ ) , श्री अश्विनी जोशी ( धारूहेड़ा ) , श्री ओमप्रकश कल्याणे ( नयी दिल्ली ) , कर्नल केशव सिंह ( ग्रेटर नॉएडा ) , श्रीमती किरण मिश्रा ( नॉएडा ) , श्रीमती कुसुम सिंह ( कानपुर ) , श्री कपिल कुमार (बेल्जियम ) , श्रीमती गुंजन श्रीवास्तव (कटनी , म प्र ) , श्रीमती डॉली अग्रवाल ( तावडू , गुरुग्राम ) ,श्रीमती चांदनी वर्मा ( बागपत ) , डॉ ज्योत्स्ना जैन ( नयी दिल्ली ) , सुश्री तन्वी सिंह ( आरा , बिहार ) , डॉ दुर्गा सिन्हा ‘उदार ‘ ( फरीदाबाद ) , श्री दीपचंद महावर ‘शादाब “ (दहोद , गुजरात ) ,श्री देवेश पाण्डेय (बिहार ) ,श्रीमती निवेदिता मिश्रा झा (दिल्ली ), श्रीमती नीतू गोयल (मोहाली ) ,श्रीमती नीरजा मेहता ( गाजियाबाद ) , श्री नसीर खान ( नयी दिल्ली ) , श्री नरेन्द्र श्रीवास्तव ‘अटल ‘ ( खारगोन, म प्र ) ,डॉ नरेश सागर (हापुड़ ) , श्री नवेंदु चाँद ( दिल्ली ) , श्री निहाल मोदी (बिहार ) , श्रीमती नीरू मोहन ( दिल्ली ) , श्रीमती नीरा अरीन जैन ( जयपुर ) , श्रीमती निधि मुकेश भार्गव (दिल्ली ), श्रीमती प्रिया सिन्हा ‘संदल’ (नॉएडा ) ,श्रीमती पारुल भार्गव (ग्वालियर ) , श्रीमती पूनम चन्द्रवंशी ( नॉएडा ) , श्रीमती प्रज्ञा जैमिनी ( दिल्ली ) , सुश्री प्रीति दक्ष ( दिल्ली ) , डॉ प्रशांत देव मिश्रा (एटा ) , श्री फरहत जामा खान सागर (नजीबाबाद ), डॉ बेगराज सिंह यादव (नजीबाबाद ) , श्रीमती भूपिन्दर कौर ( दिल्ली ) , सुश्री भारती सिंह रघुवंशी (दुबई ) , श्री मनोज कुमार यादव (कानपुर ) , डॉ मीना नकवी (मुरादाबाद ) , श्रीमती मनु श्वेता (खतौली , मुज़फ्फरनगर ) , श्री मनोज उपाध्याय ‘मतिहीन’ (रायपुर , छत्तीसगढ़ ) , श्रीमती मीनाक्षी माथुर (जयपुर ) , श्रीमती मीनाक्षी सुकुमारन ( नॉएडा ) , डॉ मीनू पाण्डेय ( भोपाल ) , श्री महेंद्र शर्मा ‘मधुकर ‘ (फरीदाबाद ) , श्रीमती मनीषा जोशी ( ग्रेटर नॉएडा ) , श्री मोहन लाल तेजियान ( हापुड़ ) , श्रीमती माधुरी स्वर्णकार ( दिल्ली ) , श्रीमती यश किरण ( लखनऊ ) , श्री राहुल कुमार ( बिहार ) , श्री रजनीश भारद्वाज ( इंदौर ) , डॉ रविश रंजन ( बिहार ) ,श्रीमती रोहिणी धमीजा ( मुरादाबाद ) , श्रीमती रुपिंदर बरार ( मोहाली ) , श्रीमती रंजीता नाथ घई ( अलवर ) , श्रीमती रंजीता अशेष ( नयी दिल्ली ) , श्रीमती वर्षा वार्ष्णेय ( अलीगढ ) , डॉ विमला व्यास ( इलाहबाद ) , श्री विजय स्वर्णकार ( दिल्ली ) , डॉ विश्व दीपक बमोला ( नयी दिल्ली ) , श्री विनोद कुमार वर्मा ( गाजियाबाद ) , श्री विष्णु शर्मा ( भिलाई ) , श्री विवेक शर्मा ( आगरा ) , डॉ वीणा मित्तल ( गाजियाबाद ) , श्री विकास जैन ( दिल्ली ) , डॉ वीर पटेल ( बंगार्मौ , उन्नाव ) , श्रीमती शीतल गोयल ( ग्रेटर नॉएडा ) , सुश्री शिप्रा खरे (गोला , खीरी ) , डॉ शुभंकर मुख़र्जी ( कुरुक्षेत्र ) , श्री सचिन मेहरोत्रा ( लखनऊ ) , श्रीमती संगीता शर्मा ( अलवर ) , श्रीमती सरोज तिवारी ( पटना ) , श्री संजीव बेदी ( आगरा ) , श्रीमती सविता वर्मा ‘गजल’ ( मुज़फ्फरनगर ) , डॉ सीमा अग्रवाल ( मुरादाबाद ) , श्रीमती सीमा अग्रवाल ( नयी दिल्ली ) , श्रीमती सीमा भाटिया ( लुधियाना ) , श्रीमती सूक्ष्म लता महाजन ( नॉएडा ) , श्री सुंदर सिंह ( दिल्ली ) , श्री सुनील आशियाँ (जयपुर ) , डॉ सुषमा शर्मा (मेरठ ) , श्रीमती सरिता ‘रीत’ ( नामरूप , आसाम ) , श्री सौरभ अवस्थी ( लखनऊ ) , श्रीमती स्वदेश सिंह चरौरा ( फरीदाबाद ) , श्री हरी प्रकाश गुप्ता ( भिलाई ) ..आगमन परिवार की ओर से संदल सुगंध के रचनाकारों का दूर दूर से आ कर इस कार्यक्रम को भव्यता प्रदान करने के लिए तहे दिल से शुक्रिया ...उम्मीद है कि भविष्य में भी उनका ऐसा ही स्नेह और सहियोग आगमन परिवार को मिलता रहेगा .
आगमन समूह की सह –संस्थापक डॉ स्वीट एंजेल के सुमधुर स्वागत भाषण और उन्ही के सञ्चालन में श्रीमती मंजू जोहरी ‘मधुर’ द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वन्दना से शुरू डॉ अशोक मधुप की अध्यक्षता में सम्पन्न इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री लक्ष्मी शंकर बाजपेयी , एवं विशिष्ट अतिथि श्री मंगल नसीम , डॉ हरीश नवल , श्री सुभाष चंदर , श्री दिनेश रघुवंशी , श्रीमती ममता किरण की गौरवमयी उपस्थिति को सादर नमन
कार्यक्रम की अगली श्रंखला में आगमन सम्मान समारोह आयोजित किया गया ...श्री दिनेश रघुवंशी एवं श्रीमती ममता किरण को ‘आगमन भूषण सम्मान -2017” से अलंकृत करना आगमन परिवार के लिए अविस्मर्णीय पल थे ....श्रीमती इंदिरा पूनावाला को अमृता प्रीतम सम्मान -2016 से अलंकृत किया गया .राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त गज़लकार श्रीमती तूलिका सेठ को “पंडित ओमप्रकाश चतुर्वेदी ‘पराग’ आगमन शिखर सम्मान -2017”प्रदान किया गया ..आगमन समूह के सदस्यों को आगमन समूह के कार्यक्रमों एवं गतिविधियों में सराहनीय योगदान हेतु हर वर्ष प्रदान किया जाने वाला ‘आगमन गौरव सम्मान -2017” आगमन समूह के निम्न सक्रिय सदस्यों को प्रदान किया गया
श्रीमती भूपिन्दर कौर ( दिल्ली ), श्री दीपचंद महावर ‘शादाब ( दहोद, गुजरात ) “, श्री फरहत जमा खान ‘सागर’ ( नजीबाबाद ), डॉ वीर पटेल ( उन्नाव ) , श्रीमती पारुल भार्गव ( ग्वालियर ) , श्रीमती निधि मुकेश भार्गव ( दिल्ली ) , श्रीमती रंजीता अशेष ( नयी दिल्ली ) , श्री महेंद्र शर्मा ‘मधुकर’ (फरीदाबाद ) , श्रीमती कुसुम सिंह ( कानपुर ) , डॉ वीणा मित्तल ( गाजियाबाद ) , श्रीमती डॉली अग्रवाल ( तावडू , गुरुग्राम ) , श्री संजीव बेदी ( आगरा ) , सुश्री शिप्रा खरे ( गोला , खीरी ) , श्री विष्णु शर्मा ( भिलाई )
युवा शायर श्री सचिन मेहरोत्रा (लखनऊ ) , युवा कवि श्री विकास जैन (दिल्ली ) , युवा कवयित्री सुश्री तन्वी सिंह ( आरा , बिहार ) , युवा कवयित्री श्रीमती चांदनी वर्मा ( बागपत ) को आगमन युवा प्रतिभा सम्मान -2017 से अलंकृत किया गया .
श्री कपिल कुमार ( बेल्जियम ) के मुक्तक संग्रह “सुनहरे अश्क “ का लोकार्पण आगमन के इस कार्यक्रम की उपलब्धि रहा ..बेल्जियम में रह रहे और वहां हिंदी के प्रचार एवं प्रसार के सराहनीय कार्य कर रहे कपिल जी का अपनी पुस्तक का लोकार्पण आगमन के मंच से सम्पन्न कराने की सहमती देना आगमन समूह के लिए गौरव के पल के रूप में अविस्मर्णीय बन गए ...अपने संबोधन में कपिल जी ने अपने संग्रह से कुछ मुक्तक पड़े और अपने कुछ दिली जज्बात प्रस्तुत किये ..श्री दिनेश रघुवंशी , श्री विनोद पाण्डेय आदि ने विशेष रूप से कपिल जी के व्यक्तिव एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला एवं आगमन समूह को सुन्दर आयोजन के लिए बधाई दी
अपने अपने वक्तव्यों में श्री लक्ष्मी शंकर बाजपेयी , श्री मंगल नसीम , डॉ हरीश नवल , श्री सुभाष चंदर ने कविता , साहित्य के मर्म , धर्म पर अपने अनुभवों से युवा रचनाकारों के प्रेरणाश्रोत की अपनी भूमिका एवं दायित्व का बखूबी निर्वहन किया और इन सभी साहित्य के पुरुधाओं को आगमन परिवार का दिल से नमन
श्रीमती ममता किरण ने अपने सुमधुर कंठ से अपने काव्य पाठ से पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध किया ..डॉ सविता उपाध्याय (गुरुग्राम ) ने भी इस अवसर पर आगमन पत्रिका के “मृदुला सिन्हा केन्द्रित अंक “ के विषय में बताया
समारोह के दूसरें सत्र में संदल सुगंध के रचनाकारों एवं आगमन समूह के आजीवन सदस्यों ने अपने काव्य पाठ से मन मोह लिया ..एक से बढ़ कर एक सारगर्भित रचनाये प्रस्तुत कर उन्होंने ये साबित कर दिया कि नवोदित कवि /शायर जिसजिस तरीके से अपनी रचनाधर्मिता का निर्वहन कर रहे हैं उससे कविता /ग़ज़ल का भविष्य उनके हाथो में सुरक्षित है ..कार्यक्रम के दूसरें सत्र का सञ्चालन आगमन समूह की संयुक्त महासचिव एवं लोकप्रिय कवयित्री /लेखिका श्रीमती मनीषा जोशी ने किया
अंत में डॉ अशोक मधुप के अध्यक्षीय संबोधन के पश्चात आगमन की उपलब्धियों में एक और यादगार कार्यक्रम जुड़ गया ..पूरी आगमन टीम को दिल से बधाई
आगमन पंचम स्थापना दिवस समारोह की लाइव रिकॉर्डिंग Live50 चैनल द्वारा की गयी ..आगमन की तरफ से Live50 की पूरी टीम का तहे दिल से आभार

Monday, 11 September 2017

                         १४७,आगमन सम्मान समारोह 

माँ शारदे की असीम कृपा से कल (10/9/17) दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी में आगमन स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर साझा काव्य संग्रह "संदल सुंगध " का विमोचन समारोह और काव्य पाठ का भव्य आयोजन हुआ ! देश विदेश के वरिष्ठ रचनाकार व अन्य रचनाकारों का अदभुत संगम था ! मेरे काव्य पाठ के साथ मुझे भी मंच पर सम्मानित होने का गौरव प्राप्त हुआ ! परमपिता ईश्वर,गुरूजी और आदरणीय पवन जैन सर का बहुत बहुत आभार !!






                           १४६,ख्वाब और तुम 

जय श्री कृष्णा मित्रो ,मेरी दो कविताएं 3/9/17के एक्सप्रेस न्यूज़ भोपाल में ,



Friday, 8 September 2017

                            १४५,अनमनी सी 

जय श्री कृष्णा मित्रो ,मेरी कविता जोधपुर के दैनिक नवज्योति में ,7/9/17 

Wednesday, 6 September 2017

                                           १४४ ,संस्मरण 

संस्मरण ;
अक्सर दराजों के संदूक से
झांकती नजर आती हैं कुछ यादें
जिन्हें छिपाना मुश्किल ही नहीं 

नामुमकिन नजर आता है ।
नासूर बनकर दिल मे धड़कती हैं 
आज भी कब भूलती हैं वो कड़वी यादें
चुप चुप रहना तन्हाई में ,
अपलक सांझ को देखना
और याद करना वो गुजरा जमाना
क्या तुमको याद नहीं आती
वो सहमी सी हंसी मेरी
वो घण्टों पेंटिंग रूम में बैठकर
तस्वीरों के साथ रंगों से अठखेलियां करना ।
पेपर आने पर कुछ याद आना
नोट्स के लिए कुछ इस तरह से भोले बन जाना
जैसे एक बच्चा खिलौने की जिद करता है ।
वो कॉलेज की पुरानी भूली बिसरी यादें
आज भी दिल को बरबस रुला जाती हैं
हां कैसे भूल सकता है कोई
जीवन के सबसे सुंदर पड़ाव को
जहां होती है चाहतें सिर्फ
उड़ने की खुले आकाश में ।
दुनिया को कुछ कर दिखाने की
अनगिनत तमन्नाएं ।।

                                              १४३ ,प्रेम 

जय श्री कृष्णा मित्रो ,शुभ संध्या ।मेरा एक और लेख सौरभ दर्शन साप्ताहिक पत्रिका (राजस्थान)में ,

                                        142GOd

Mere bete Ki req par mera first attempt .Waiting your reactions 💐


                               १४१,आरक्षण 

aaj aarakshan hamare desh me aik abhishap ban gaya h .aarakshan jaise beta sabko chaiye par mehnat jaise beti kisi ko nahi .
Aarakshan = beta 
mehanat =beti 
आज आरक्षण हमारे देश में एक अभिशाप बन गया है !आरक्षण जैसे बेटा सबको चाहिए ,पर मेहनत जैसे बेटी किसी को नहीं !!
आरक्षण = बेटा 
मेहनत =बेटी 

                                     १४०,ज्योतिष 

जय श्री कृष्णा मित्रो ,मेरी कविता हिंदी की मासिक पत्रिका ज्ञान गंगा (अलीगढ़) के अगस्त अंक में ।

Friday, 25 August 2017

                                   १३९,लेख 

बहुत मुश्किल है किसी के दर्द को समझना । वो बच्चे जो बचपन में ही अनाथ हो जाते हैं समय से पहले ही बड़े और समझदार भी हो जाते हैं । क्या कोई उनकी मनोदशा को समझ सकता है ? बचपन मे प्यार का अभाव मानो उनकी पूरी जिंदगी को ही बदल कर रख देता है ।माँ बाप की कमी को दुनिया की कोई भी शै कभी पूरा नहीं कर सकती ।ऐसे बच्चे हर समय प्यार पाने को लालायित रहते हैं । सामने वाले हर शख्स का झूठा प्यार भी मानो उन्हें अमृत लगता है ।ये दुनिया जो हमेशा से सिर्फ अपना मतलब पूरा करके अलग हो जाती है ,इस प्यार की कमी का अहसास कैसे कर सकती है ?माँ बाप के न होने से अनगिनत माँ पिता तैयार हो जाते हैं लेकिन सिर्फ अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए । कोई उनकी भावनाओं का मोल नही समझ पाता । ऐसे बच्चे हमेशा प्यार की कमी का दंश उम्र भर झेलते हैं ।कहीं कहीं देखा भी गया है कि यदि कोई उन्हें गोद ले लेता है या कुछ मदद करता है तो उसका बदला जरूर चाहता है ।वो बच्चा कभी खुलकर सांस भी नहीं ले पाता ।एक गुलामी का डर ताउम्र साथ रहता है । क्या अनाथ बच्चों की मदद करने से कोई गरीब भी हो सकता है ?अरे लोग तो कितना दान करते हैं फिर भी घाटा नहीं होता ,फिर किसी की मदद करने से किसी के यहां कमी कैसे आ सकती है ?प्यार सभी की एक जन्मजात जरूरत है ,यदि हम किसी की पैसों से मदद न कर पाएं तो अन्य और भी तरीके हैं । ऐसे बच्चों को समझना आसान काम नहीं ।ये जिसके साथ भी दोस्ती और प्यार का रिश्ता बनाते हैं आजीवन निभाने की कोशिश करते हैं फिर भी एक कमी जीवन भर पीछा नहीं छोड़ती ,और शायद आंसूं ही इनकी तकदीर बन जाते हैं ।
कैसे समझ पायेगा कोई दर्द को ,
लकीरों से कब जख्म भर पाते हैं ।
अश्क़ देने वालों में शामिल है नाम उनका भी ,
दे जाते हैं जिल्लत जो माँ बाप का फर्ज भूलकर ।
वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़
 १३८,

                                 १३७/कविता 

हर हर महादेव ,मित्रो आपका दिन शुभ हो ।
मेरी कविता मुंबई की मासिक पत्रिका जयविजय के अगस्त अंक में

                                          १३६ ,शेर 

दस्तक प्यार की नींद उड़ा जाती है ,
इश्क़ ख्वाब है या जन्नत की बातें ।

Friday, 18 August 2017

१३५,मेरा लेख

http://www.badaunexpress.com/badaun-plus/a-4364/

जब तक इंसान बाहरी मोह में फंसा हुआ है ,आंतरिक खुशी को महसूस ही नहीं कर सकता । विषय वासना इंसान को उम्र भर स्वयं से अपरिचित ही रहने देती हैं ।स्वयं को पहचानने के लिए भोगों से मुक्त होना जरूरी है । इंसानी स्वभाव है कि वो जो कुछ भी करता है ,उसके बदले की आशा जरूर रखता है । दुनियादारी और मोह उसे खुद से दूर करते चले जाते हैं और यहीं से एक नई बीमारी जन्म लेती है अवसाद की । अवसाद यानि डिप्रेशन -hypertenstion ,high Bp । जब अपनी सारी तमन्नाओं को दबाकर हम दूसरों की इच्छाओं की तृप्ति में लग जाते हैं वहीं हमारे अंदर नकारात्मक विचार पैदा होने लगते हैं । इस संसार का एक नियम है जब तक आपकी जरूरत है सामने वाला हर व्यक्ति आपकी इज्जत करता है लेकिन जब वही जरूरत खत्म हो जाती है उस व्यक्ति को आपके अंदर कमियां ही कमियां नजर आने लगती हैं ।आप ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्य पालन में लगे रहते हैं लेकिन स्वयं को भुलाकर खुद को असहनीय कष्ट भी देते हैं ।जरा सोचिए क्या आपके किये हुए अच्छे कार्य किसी को समझ आते हैं ? क्या हम खुद को भूलकर दूसरों को खुशी दे सकते हैं ।देखने मे तो ये बातें स्वार्थपूर्ण लगती हैं लेकिन यह भी उतना ही सत्य है जितना जिंदगी और मौत । तो क्यों न हम खुद की खुशियों को भी नजरअंदाज न करें ।कुछ समय खुद के लिए भी निकालें ।प्रतिदिन योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं जिससे हम स्वयं को भी पहचान पाएं ।जब हम खुश होंगे तभी औरों को भी खुश रख सकते हैं वरना ताउम्र बीमारी और दवाओं का बोझ लेकर घूमते रहना ही हमारी मजबूरी बन जाएगी।
एक स्वस्थ व्यक्ति ही देश और समाज की उन्नति में सहायक बन सकता है ।
एक अंतिम और कड़वा सत्य तो यही है ,जो स्वयं खुश है वही दूसरों को भी खुशियां दे सकता है ।
वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़

Tuesday, 15 August 2017

१३४,स्वतंत्रतता दिवस

15 अगस्त भारत के 71वे स्वतंत्रता दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं ।

जय भारत जय हिंद
हिंदी ,हिन्दू ,हिन्दुतान ,
भारत की सही पहचान ।
सर्वधर्म समानता ,
विश्व में इसकी शान ।

१३३.कृष्णा जन्माष्टमी

जय श्री कृष्णा ,आप सभी को मेरे कान्हा के जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई । दिल से लिखी एक कविता मेरे प्यार मेरे कृष्णा को समर्पित करती हूं  ।आभार सौरभ दर्शन साप्ताहिक पत्र भीलवाड़ा (राजस्थान) 12/8/17 .

प्यार हो तुम
दिल का अहसास हो तुम
संजोया था कभी ख्वाब में
उसी ख्वाब का राज हो तुम
भूल जाती हूँ जिंदगी को भी
उस जिंदगी का साज हो तुम
बाबरी हो गयी बनकर मीरा
ओ मेरे प्राण मेरे कृष्णा हो तुम।
बांसुरी की धुन पर दौड़ आयी थी कभी
वही राधा के कृष्णा हो तुम।
चाहती हूं बन जाऊं तेरे होठों की बंशी
ओ गोपाला मेरे कान्हा हो तुम।
लगन मेरी बुझा देना ओ सांवरे,
मेरे दिल के छैला हो तुम।
जला दी प्रेम की बाती
मेरे सूने से आंगन में ।
राधा के श्याम
रुक्मणी के भरतार हो तुम।
प्यार में तेरे बनकर बाबरी
सुध बुध अपनी भुला बैठी।
ओ कृष्णा मुझे कभी न भुला देना।
मेरी नैया मेरे जीवन की पतवार हो तुम।
सब कुछ कह दिया ओ गिरधारी ,
मेरी सूनी जिंदगी के रिश्तेदार हो तुम।
वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़

Sunday, 13 August 2017

                             १३२ शेर 

इश्क बदनाम है नाम से ,
काफ़िर जिंदगी क्यूँ बदनाम नहीं !
दस्तक दिल पर देकर इश्क को
बदनाम करने का हुनर कहाँ से सीखा इसने !



खुशबू प्यार की दिल को महका जाती है ,
क्यूँ दुनिया को नफ़रत है प्यार के नाम से !

                           १३१,हमारा भारत महान 

जय श्री कृष्णा मित्रो आपका दिन शुभ हो ।15 aug के उपलक्ष्य में मेरी रचना कल12/8/17 के दैनिक करंट क्राइम (नई दिल्ली ) में ! आभार 
जय हिंद जय भारत

                              १३० ,फेसबुक 

जय श्री कृष्णा मित्रो ,शुभ संध्या !!
फेसबुक एक ऐसा माध्यम है जहाँ हम अनगिनत अनजान लोगों के संपर्क में आते हैं ! जब कभी जिंदगी बोझ लगने लगती है ,यहाँ आकर लगता है जैसे दुनिया में बहुत कुछ है ! अपना सुख दुःख सभी एक दूसरे से शेयर करने लगते हैं ! ऐसा महसूस होता है ये एक बहुत बड़ा परिवार है ! जिन बातों को हम हमेशा गलत मानते हैं ,समझते हैं फिर भी जानकर उन्हीं रास्तों पर चलने लगते हैं ! किसी से भी अत्यधिक निकटता सिर्फ दुःख का ही कारण बनती है ! अपने लक्ष्य को भूलकर अनजाने रास्तों पर चलना जीवन को गतिहीनता ही देना है ! तो आइये कुछ ऐसा करें जिससे हम दूसरों के साथ खुद को भी सच्ची ख़ुशी दे सकें ! क्या औरों को दुःख देकर हम खुश रह सकते हैं ??/???

                                 १२९,बाल विवाह 

मेरी रचना सौरभ दर्शन साप्ताहिक पत्र राजस्थान (भीलवाड़ा )में प्रकाशित हुई ,आभार संपादक मंडल ।

                                       १२८,अल्पना 

जय श्री कृष्णा मित्रो ,शुभ संध्या ।
मेरी रचना दैनिक सांध्य ज्योति (भरतपुर )में आपकी समीक्षा के लिए ,

                                        १२७ लेख 

क्यों हम किसी व्यक्ति पर इतना निर्भर हो जाते हैं कि उसके बिना कुछ भी अच्छा नही लगता ?जिंदगी अचानक रुकी हुई लगने लगती है ।संसार मे हर व्यक्ति अपनी हजारों समस्याओं से घिरा हुआ है ,जरूरी तो नही कि जब आप चाहे सामने वाला व्यक्ति आपके लिए हाजिर हो ।मानव स्वभाव हर व्यक्ति को अपना जैसा समझने पर मजबूर है । घर ,परिवार ,समाज सभी की कुछ न कुछ चाहत होती हैं।क्या एक व्यक्ति एक समय मे सभी की इच्छाओं की पूर्ति कर सकता है ?इंसान इंसान है ,भगवान तो नहीं ।फिर किसी व्यक्ति से इतनी अपेक्षाएं क्यों ??????

Saturday, 29 July 2017

                                 १२६,,गेरुआ 

लिबास पहनकर गेरुआ बैठ संतों के संग !
मान लिया ढोंगियों ने खुद को प्रभु का अंग ।!


न जाने किसकी तलाश है ,
हर दिन जिंदगी लगती ख़ास है !!

आजाद देश के परिंदे रहते आज उदास हैं ,
महफ़िल में आज भी कहकहों के तख्तो ताज हैं !!


                                        १२५,अहसास

 जय श्री कृष्णा ,मेरी कविता अहसास saahitypedia पर ,

http://sahityapedia.com/13%E0%A4%85%E0%A4%B9%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B8-84827/


जर्रा जर्रा वक़्त का जैसे रो रहा था ,
आंसुओं से कोई चेहरा भिगो रहा था ।
मासूम थी मोह्हबत कहीं सिर झुकाए ,
हर घड़ी कोई दिल में यादों के जख्म चुभो रहा था।
प्यार की भाषा कब दे पाती है कोई परिभाषा ,
दिल क्यों दिल को यकीन दिला रहा था
दर्द था कोई मीठा सा अनजान की यादों का ,
सुनने को बेताब दिल आवाज किसी की,
दिल को खामोशी से सहला रहा था ।
कब समझती है मोह्हबत कायदे और कानून ,

एक भीगा सा अहसास जैसे कोई गुनगुना रहा था ।